

दिल्ली में आंदोलन
आखिरकार कॉकरोचों की जीत हो गई और देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। सडक़ से संसद तक जो आंदोलन हुआ उसका असर रहा और युवाओं की भावनाओं का ख्याल करते हुए प्रधान ने इस्तीफा दे दिया। दिल्ली में पेपर लीक को लेकर कॉकरोच पार्टी द्वारा शुरू किये गये आंदोलन का असर जरूर दिखाई दिया। हालांकि आंदोलन में जो अराजकता हुई उसे भी सही नहीं ठहराया जा सकता। आज फिर जंतर-मंतर पर जिस तरह पुलिस पर पत्थर फेंके गये एसीपी घायल हुए ये काम छात्र नहीं कर सकते। आखिर कौन है उपद्रवी, उन पर कार्रवाई होना चाहिए। अमूमन देखा गया है कि इस तरह के आंदोलन में असामाजिक तत्वों की एंट्री जरूर हो जाती है जो देश की सुरक्षा व्यवस्था को खतरे में डाल देते हैं। आंदोलन की आड में ऐसे लोग अप्रिय घटना करने से भी पीछे नहीं रहते और आंदोलन का स्वरूप बदल जाता है। यहां भी कुछ ऐसा ही प्रयास हुआ और शांति से चल रहा आंदोलन उग्र हो गया। अब तक पुलिस की जांच में पांच सौ से अधिक लोग ऐसे पाये गये हैं जो संदिग्ध हैं। जाहिर है ऐसे लोग केवल माहौल खराब करने के लिए आते हैं। फिलहाल कॉकरोच पार्टी ने जिस तरह से आंदोलन शुरू किया और आज भी वो डटे हुए हैं, उनके व्यवहार से घबराहट जरूर हो गई है। रातोंरात बनी कॉकरोच पार्टी ने अपना दमखम जरूर दिखाया। यही कारण है कि सरकार को जहां बात करने के लिए मैदान में आना पड़ा वहीं प्रधानमंत्री को भी मैसेज जारी करके पेपर लीक के बारे में बयान देना पड़ा। इस आंदोलन में एक बात और निकलकर आयी है कि ये कॉकरोच पार्टी कोई धनवानों की पार्टी नहीं है लेकिन अब एक दूसरे से मैसेज करके अपील की जा रही है कि पानी या अन्य सामान या खाने-पीने की व्यवस्था करके जंतर-मंतर पहुंचे। इस अपील का इतना असर हो रहा है कि तमाम खाने-पीने की व्यवस्था लेकर जंतर-मंतर पहुंच रहे हैं यदि किसी आंदोलन को इस तरह का समर्थन मिलता है तो निसंदेह इस तरह के आंदोलन आम जनता से जुड़ जाते हैं। हालांकि इसमें राजनीति भी हो रही है। विपक्षी दल खूद दूसरों के कंधों पर बंदूक रखकर अपनी राजनीति चमका रहे हैं लेकिन जिस तरह लोग खाने-पीने की चीजें लेकर पहुंच रहे हैं इससे आंदोलन को जरूर बल मिल रहा है। कहते हैं कि युवाओं में वास्तव में शक्ति होती है बस जरूरत इस बात की है कि उनकी सोच सकारात्मक बनी रहे। जय हिंद

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