गाजियाबाद में पंजाबी समाज पूछ रहा है बड़ा सवाल
गाजियाबाद (युग करवट)। भारतीय जनता पार्टी में चुनावी हिस्सेदारी पर कई समाज अपना अधिकार मांग रहे हैं। इनमें पंजाबी समाज भी है। गाजियाबाद की राजनीति में पंजाबी समाज दशकों से हाशिए पर है। बताया जाता है कि सरदार तेजा सिंह गाजियाबाद के पहले विधायक थे, उसके बाद किसी राजनीति दल ने पंजाबी और सिख समाज को चुनाव लडऩे का मौका नहीं दिया। हालांकि इक्का दुक्का अपवाद से इंकार नहीं किया जा सकता। मगर पिछले दो दशक से तो किसी दल ने पंजाबी समाज के व्यक्ति पर विश्वास नहीं जताया है। जबकि तकरीबन हर दल में पंजाबी समाज के लोग मौजूद रहे हैं।
पंजाबी समाज ने इस मामले में एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जो तकरीबन सभी राजनीतिक दलों के लिए अबूझ पहेली सा बना हुआ है। इस बारे में पूर्व पार्षद हिमांशु लव का कहना है कि सुरेश खन्ना शाहजहांपुर सीट से नौ बार विधायक चुने जा चुके हैं। वह बताते हैं कि शाहजहां सीट पर पंजाबी समाज की मतदाता संख्या पांच हजार के आस पास या इससे कुछ अधिक ही होगी। अगर चुनाव प्रत्याशी की अपनी जाति के मतदाताओं की संख्या की ही बदौलत जीता जाता है तो सुरेश खन्ना कैसे लगातार नौ योजनाओं से विधायक हैं। श्री लव का अगला सवाल है कि जब पांच हजार पंजाबी वोट होते हुए शाहजहांपुर से पंजाबी समाज का व्यक्ति चुनाव जीत सकता है तो गाजियाबाद में तो इस समाज की वोट दो लाख से भी अधिक हैं। दो लाख वोट होने पर भी गाजियाबाद में पंजाबी समाज के व्यक्ति को चुनाव में टिकट क्यों नहीं दिया जाता।
गाजियाबाद में स्वर्गीय तेलूराम काम्बोज मेयर चुने गए थे, जबकि उनके समाज की वोट तो गिनती की ही हैं। पंजाबी समाज को लगता है कि राजनीतिक दल उनके साथ न्याय नहीं कर रहे हैं। गाजियाबाद में पंजाबी समाज की अच्छी खासी मतदाता संख्या है, हर दल में इस समाज के मजबूत नेता हैं। मगर उसके बाद भी समाज को टिकट से वंचित रखा जाता है, जो पंजाबी समाज के अधिकार का हनन है।