अपने मियां-मिट्ठू बनने पर सवाल
देश के प्रति राष्टï्रप्रेम की भावना रखने वाले संगठन आरएसएस की बदौलत ही भाजपा आज सत्ता में है। अगर कोई ये समझता है कि संघ के बिना वो सत्ता हासिल कर सकता है तो ये उसकी गलतफहमी है। भाजपा के पूर्व राष्टï्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का ये बयान कि अब भाजपा को संघ की जरूरत नहीं है। २०२४ के लोकसभा चुनाव में भाजपा ४०० सीटों का दावा कर रही थी और उसे बहुमत भी नहीं मिला ये केवल इस बयान का ही नतीजा ही था। इसलिए संघ को नजरअंदाज करना आसान नहीं है। जब-जब भाजपा पर कोई संकट आया है तो आरएसएस ने ही उसे संभाला है इससे इनकार नहीं किया जा सकता। अभी हाल ही में जंतर-मंतर पर जो कुछ हुआ उससे संघ बहुत ही चिंचित है। यही कारण है कि अभी हाल ही में विशाखापट्नम में तीन दिवसीय संघ की समन्वय बैठक हुई जिसमें जंतर-मंतर के प्रदर्शन को लेकर सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा हुई और मोदी सरकार की कार्यप्रणाली पर चिंता भी व्यक्त की गई। बैठक के बाद मीडिया से जिस तरह बातचीत करते हुए संघ के एक वरिष्ठ पदाधिकारी सीआर मुकुंद ने जिस तरह की बातें कही उससे इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि ये सीधे तौर पर मोदी सरकार पर निशाना था। उनका कहना था कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन केवल भ्रष्टïाचार का मुद्दा नहीं है ये सीधा-सीधा व्यवस्था से भी नाराजगी है। व्यवस्था से मतलब केंद्र सरकार। उन्होंने ये भी कहा कि केवल युवाओं को उपदेश देने और उनको भाषण सुनाने से बात नहीं बनेगी। आपको याद होगा कि जंतर-मंतर के प्रदर्शन के बाद देश के प्रधानमंत्री ने युवाओं को संबोधित किया। संघ की टिप्पणियां और सवाल केंद्र सरकार के लिए एक बड़ा संदेश है। अपने मियां-मिट्ठू बनकर खुद अपनी पीठ थपथपाकर भले ही लोग कुछ भी दावा करें लेकिन जमीनी तौर पर संघ ने जो महसूस किया उसी को लेकर बैठक में आत्ममंथन भी हुआ और मीडिया के जरिए जहां बात पहुंचना चाहिए थी वहां पहुंचा भी दी। बहरहाल, २०२७ के विधानसभा चुनाव यूपी में होने वाले हैं और उसके बाद २०२९ में लोकसभा के चुनाव होंगे। केंद्र सरकार को और खासकर भाजपा हाईकमान को संघ के इन सवालों पर आत्ममंथन करने की जरूरत है और इस बात का अहसास करने की जरूरत है कि संघ को नजरअंदाज करना आसान नहीं है। क्योंकि आज भी लोग संघ पर पूरी तरह से भरोसा करते हैं। उनके हर बयान को गंभीरता से लेते हैं। जय हिंद