चवन्नी वाला बयान
राजनीति में जो शब्दों के तीर चलते हैं वो बड़ा घाव करते हैं। ऐसा घाव जो फिर आसानी से भरा नहीं जा सकता। एक दशक से तो कुछ ज्यादा ही शब्दों के तीर चल रहे हैं। हालांकि अगर भाषा की बात करें तो छोटे से लेकर बड़े नेता भी इस तरह की भाषा का प्रयोग कर रहे हैं जिससे लोगों की भावनाएं भी आहत होती है। लेकिन बदलती राजनीति की तस्वीर में अब जनहित के मुद्दों पर चर्चा तो बहुत दूर की बात हो गई अब तो केवल धर्म और जाति और निजी जीवन पर हमले ही आज की राजनीति का स्वरूप बन गया है। यही कारण है कि अच्छे लोग राजनीति में अब बहुत कम हो गये हैं। जो जितना ज्यादा बोलेगा वही नेता कहलाएगा। किसी धर्म, किसी जाति के खिलाफ, किसी समाज के खिलाफ अब इस तरह की राजनीति हो रही है जो शायद पहले कभी नहीं होती थी। कुछ दशकों से जो गठबंधन की राजनीति शुरू हुई है वो भी अब भरोसे वाली नहीं रही। सुबह में कोई किसी के साथ होता है और शाम को फिर किसी और के साथ हो जाता है। जहां जिसका निजी स्वार्थ होता है उस हिसाब से राजनीतिक दलों के नेता फैसला लेते हैं। जनता जिन्हें अपना नेता मानती है और उनके चुनाव चिन्ह पर बटन दबाती है वही नेता जब चाहते हैं जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करते हुए दूसरे दलों का दामन थामने में देर नहीं करते। मिसाल के तौर पर किसी ने हाथी पर बटन पर दबाया, किसी ने साइकिल पर दबाया, किसी ने हाथ पर दबाया, किसी ने कमल पर दबाया लेकिन जिसके लिए दबाया वो सबको पीछे छोड़ते हुए अपनी निजी स्वाथ के कारण जनता की भावनाओं के विपरीत दूसरे दल का दामन थाम लेता है। अभी समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव का एक बयान चवन्नी वाला बहुत वायरल हो रहा है। हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया लेकिन जहां निशाना था वो सटीक बैठा। इस बयान को लेकर चैनल पर डिबेट भी हुई और समुदाय विशेष के लोगों ने उन्हें अपना विरोध भी दर्ज कराया। बयान को देखें तो उसमें उनका दर्द भी था लेकिन दर्द के साथ अहंकार भी था जिसे वो चवन्नी कह रहे हैं अतीत को भी उनको याद रखना चाहिए। इस चवन्नी वालों की वजह से ही आज उनका पूरा परिवार देश की राजनीति में है। अगर ये चवन्नी वाले नहीं होते तो आज स्व. मुलायम सिंह यादव भी राजनीति के शीर्ष स्तर पर नहीं पहुंचते। इसलिए इस तरह के बयानों से परहेज करना चाहिए और ना जाने कल फिर इन चवन्नी वालों से ही गले मिलना पड़ जाए तो क्या होगा। आज की राजनीति में कुछ भी संभव है। जय हिंद