विधानसभा चुनाव २०२७ को लेकर उत्तर प्रदेश में सभी अपने-अपने दावे कर हैं और चाहे भाजपा हो या सपा हो सभी को लग रहा है कि विधानसभा चुनाव २०२७ में उनकी सरकार बनने जा रही है। हां ये बात जरूर है कि भाजपा की राहें आसान नहीं है। लेकिन सपा के मुकाबले वो २०२२ की तरह मजबूत नहीं हैं। अभी हाल ही में भाजपा के मजबूत पूर्वांचल के सांसद जो जमीनी तौर पर नजर रखते हैं उन्होंने जो बात कही है वो काफी चौंकाने वाली है। उनका कहना है कि यूपी में इस बार भाजपा बहुत ही कांटे की टक्कर में है। एकतरफा चुनाव का माहौल नहीं है। उन्होंने इसके कई कारण गिनाये हैं। उनका कहना है कि आज की स्थिति में भाजपा ३५ में और विपक्ष ६५ में है। अगर ये मान भी लिया जाए या आगे-पीछे भी हो जाए तब भी पूर्वांचल के इन मजबूत नेता की बात पर भरोसा करें तो भी दोनों दलों के लिए कांटे की टक्कर है। लोकसभा चुनाव २०२४ की बात करें और विधानसभा के हिसाब से देखें तो २०२४ में २७५ विधानसभा सीटों पर समाजवादी पार्टी गठबंधन ने जीत दर्ज की थी। ये अपने आप में बहुत ही चौंकाने वाला आंकड़ा है और २०२४ के बाद से ही भाजपा सपा के पीडीए को लेकर गंभीर हो गई थी। हालांकि उत्तर प्रदेश में अगर कानून व्यवस्था की बात करें तो उसमें और सरकारों के मुकाबले काफी कमी आयी है। लोग बेखौफ होकर कारोबार कर रहे हैं लेकिन अफसरों की बात करें तो वो आम जनता की नहीं सुनते। अगर यूपी में योगी सरकार रिपीट नहीं हुई तो इसके लिए सरकारी मशीनरी ही जिम्मेदार होगी। क्योंकि सरकार पूरी तरह से निष्पक्षता के साथ काम कर रही है लेकिन जिलों में तैनात अफसर अपने जिम्मेदारी सही तरह से नहीं निभा रहे। सरकारी योजनाओं का लाभ जो जनता को मिलना चाहिए था वो नहीं मिल रहा है। इतना ही नहीं कई विभाग ऐसे हैं जो बिना वजह लोगों को परेशान करते हैं और उनकी जब शिकायत की जाती है तो कोई सुनवाई नहीं होती है। इसलिए अभी समय है मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चाहिए कि वो नेताओं के साथ-साथ अफसरों का भी फीडबैक लें ताकि फिर ६५ में भाजपा और ३५ में विपक्ष रह जाए। सरकार की नीयत पर कोई शक नहीं कर रहा है लेकिन अफसरों की जवाबदेही जरूर तय होना चाहिए। जय हिंद