बलदेव राज शर्मा की पुस्तक ‘मेरे संस्मरण मेरी धरोहर’ के हवाले से
दुर्भाग्यवश शाहजहांपुर में हो गई थी बस दुर्घटनाग्रस्त, जिसमें गाजियाबाद के कारसेवक दम्पति की भी हो गई थी मौत
गाजियाबाद (युग करवट)। बलदेव राज शर्मा की पुस्तक ‘मेरे संस्मरण मेरी धरोहर’ में पृष्ठ नंबर-८९ में दी गई जानकारी से ये बात सामने आयी है कि राम मंदिर निर्माण में गाजियाबाद के कारसेवक दंपति सडक़ हादसे में अयोध्या जाते हुए घायल हुए थे और बाद में उनकी मृत्यु हो गई थी। उन्होंने लिखा है कि अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि और मंदिर निर्माण आंदोलन में गाजियाबाद के सैकड़ों कार्यकर्ता गिरफ्तारी देने गये थे। जब जेलों में जगह नहीं रही तो सरकार ने छोडऩा शुरू कर दिया था। मंदिर निर्माण हेतु कार सेवक अयोध्या जाने लगे तो गाजियाबाद से मेरे परम मित्र एवं साथी जो १९७१ में नगर पालिका गाजियाबाद में पार्षद रह चुके थे डॉ. ओमप्रकाश जोशी, जगदीशनगर निवासी पं. रूपलाल उनकी धर्मपत्नी श्रीमती सुदेश शर्मा और अन्य कई कारसेवक बस द्वारा गाजियाबाद से अयोध्या के लिए रवाना हुए।
जब उनकी बस बरेली पार कर शाहजहांपुर पहुंची तो दुर्भाग्यवश एक बड़ा हादसा हुआ। बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई और परिणाम स्वरूप चार कारसेवकों की मौके पर मौत हो गई। इसमें गाजियाबाद के साथी डॉ. ओमप्रकाश जोशी भी थे। उनके अलावा पं. रूपलाल और उनकी धर्मपत्नी भी घायल हो गई बाद में उनकी मृत्यु हो गई। श्री राम मंदिर निर्माण हेतु गाजियाबाद के कारसेवकों का बलिदान हमेशा याद रहेगा। उन्होंने लिखा है कि हमारी बस ४ दिसंबर १९९२ को सरस्वती शिशु मंदिर नेहरूनगर गाजियाबाद से दोपहर १२ बजे चलनी थी। अब सभी कारसेवक बस में सवार हो चुके थे। लेकिन अयोध्या से समाचार आया कि अयोध्या में भारी संख्या में देश के कौने-कौने से लाखों कारसेवक पहुंच चुके हैं इस कारण अब और कारसेवक ना भेजे जाएं। इस आदेश के कारण हम सभी को बस में जो सवार थे उतार दिया गया और फिर ६ दिसंबर को अयोध्या में क्या हुआ ये आप जानते हैं। पुस्तक में खुलासे के बाद ये बात एक बार फिर प्रमाणित होती है कि गाजियाबाद के लोग देश में जब भी कहीं कोई संकट आता है या देश की आन-बान पर कोई आंच आती है तो यहां के लोग पूरी तरह से देश के साथ खड़े नजर आते हैं। मंदिर आंदोलन में गाजियाबाद के कारसेवकों की अहम भूमिका को नहीं नकारा जा सकता।