रूडक़ी (युग करवट)। हजरत मखदूम सैयद अलाउद्दीन अली अहमद साबिरेपाक के ७५८वें उर्स का रूहानी आगाज हजारों की संख्या में आने वाले अकीदतमंदों की मौजूदगी में शुरू हुई। रसमें मैंदी डोरी सज्जादानशीं शाह अली एजाज सावरी मेहंदी डोरी की थाल संदल और प्रसाद लेकर जायरीन के साथ दरगाह पर पहुंचे। कई सौ साल से इसी तरह लाखों की संख्या में लोग पिरान कलियर शरीफ पहुंचते हैं और अपनी दुआएं मांगकर झोलियां भरते हैं। ओलिया अल्लाह के दरबार में कोई जाति कोई धर्म नहीं होता वहां सिर्फ मानवता ही दिखाई देती है। दरगाह पर आने वाला हर व्यक्ति चाहे वो किसी धर्म या जाति का हो वो अपनी दुआओं के लिए आता है।