लखनऊ (युग करवट)। देश के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्याथ व केन्द्रीय सडक़ परिवहन मंत्री नितिन गडक़री ने 42 हजार करोड़ रुपए की लागत से बने 63 किलोमीटर लंबे कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेस वे का उद्घाटन हाल ही में किया है। इस एक्सप्रेस वे के बनने से कानपुर और लखनऊ की दूरी महज अब 40 मिनट में तय हो सकेगी।
एनएचएआई के चेयरमैन वरिष्ठ आईएएस संतोष यादव ने बताया कि यह प्रोजेक्ट यूपी के हाई-स्पीड रोड नेटवर्क, डिफेंस कॉरिडोर और अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा। साथ ही यह एक्सप्रेस वे क्षेत्र में रक्षा उद्योग के विकास को नई रफ्तार देगा। इसको अवध एक्सप्रेस वे और डिफेंस कॉरिडोर एक्सप्रेस वे के नाम से भी जाना जाएगा।
एनएचएआई चेयरमैन संतोष यादव ने बताया कि इस एक्सप्रेसवे पर वाहनों की अधिकतम गति सीमा 120 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है। जिस पर सिर्फ कार, वैन और अन्य चार पहिया वाहनों के ही चलने की अनुमति होगी। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई 63 किमी है। इसमें से 17.52 किमी हिस्सा एलिवेटेड (ऊंचाई पर बना) है। 63 किमी में से 57 किमी हिस्से में छह लेन हैं, जिन्हें भविष्य में 8 लेन तक बढ़ाया जा सकता है। इसमें 3 इंटरचेंज हैं (एक एनएच-31 के लिए, एक लखनऊ रिंग रोड के लिए और एक एनएच-27 पर), कानपुर रिंग रोड पर एक इंटरचेंज अभी बन रहा है। बता दें कि अभी लखनऊ और कानपुर के बीच (पुराने एनएच-27 से) यात्रा करने में ट्रैफिक के हिसाब से लगभग 2-3 घंटे लगते हैं। लेकिन एक्सप्रेसवे से यात्रा का समय सिर्फ 45 मिनट होगा, यानी यात्रा के समय में 1.5 से 2.15 घंटे की कमी आएगी। इस रास्ते में 12 वीयूपी, 14 एलवीयूपी, 11 पीयूपी 1 आरओबी और 4 एमजेबी होंगे। यह एक्सप्रेस वे मौजूदा एनएच-27 पर भीड़ कम करेगा, यात्रा का समय घटाएगा, सडक़ सुरक्षा बेहतर करेगा और यात्रियों व माल ढुलाई के लिए तेज़ और भरोसेमंद ट्रांसपोर्ट नेटवर्क देगा। एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे में एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (एटीएमएस), क्लोज्ड टोलिंग सिस्टम, सीसीटीवी सर्विलांस (63 पीटीजेड कैमरे, 21 इंटरचेंज कैमरे और 16 वीआईडीएस) वेरिएबल मैसेज साइन (वीएमएस) इंसिडेंट डिटेक्शन सिस्टमए इमरजेंसी कॉल बॉक्स और ई-एनफोर्समेंट जैसी सुविधाएं होंगी, जिससे सडक़ सुरक्षा और काम करने की क्षमता में काफी सुधार होगा। सुरक्षा के लिए 63 हाई-रिजॉल्यूशन सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जो 500 मीटर तक स्पष्ट निगरानी कर सकते हैं। इनमें से 21 कैमरे इंटरचेंज पर वाहनों की गतिविधियों को देखेंगे। नियम उल्लंघन पर ऑनलाइन चालान होगा और बिना रुके गाडिय़ों की नंबर प्लेट डिटेक्ट कर टोल टैक्स लिया जाएगा। एक्सप्रेसवे पर 24 घंटे निगरानी के लिए 27वें और 35वें किलोमीटर पर दो आधुनिक कंट्रोल रूम बनाए गए हैं, जहां से ट्रैफिक प्रबंधन और आपातकालीन सेवाएं संचालित होंगी।