बलदेव राज शर्मा की पुस्तक ‘मेरे संस्मरण मेरी धरोहर’ के हवाले से
गाजियाबाद (युग करवट)। गाजियाबाद के जनसंघ से जुड़े लोग हमेशा देश के लिए समर्पित रहे हैं। दिल्ली के निकट के होने के कारण गाजियाबाद के लोग चाहे संघ से जुड़े हों, भाजपा से जुड़े हों या फिर जनसंघ से जुड़े रहे हों हमेशा देश के लिए सर्वोपरि रहे हैं।
भाजपा नेता बलदेव राज शर्मा की पुस्तक ‘मेरे संस्मरण मेरी धरोहर में’ इस बात का खुलासा हुआ है कि ८ मई १९५३ को जब ३७० के खिलाफ टे्रन निकली थी तब गाजियाबाद में उसका स्वागत ही नहीं किया गया बल्कि समर्थन भी किया गया। उन्होंने लिखा है कि २१अक्टूबर १९५१ को डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने परमपूज्य सर संघचालक श्री गुरुजी के मार्गदर्शन में अखिल भारतीय जनसंघ की स्थापना दिल्ली में की थी गुरुजी ने अपने बहुत ही समर्पित प्रचारक पं. दीन दयाल उपाध्याय को उपाध्यक्ष और अटल बिहारी वाजपेयी, श्री बलराज मधोक और वेद गुरुदत्त जी को निर्देशित किया था कि जनसंघ का कार्य देखेंगे। दीन दयाल जी को राष्टï्रीय महामंत्री बनाया गया।
अटल जी को डॉ. मुखर्जी का निजी सचिव बनाया गया। इसके पश्चात दीन दयाल जी ने राजस्थान में श्री बछराज व्यास, सुंदर सिंह भंडारी, महाराष्टï्र में जगनाथ राव जोशी, हरियाणा में डॉ. मंगल सेन, मध्यप्रदेश से कुशाभाव ठाकरे जैसे विद्वानों को जोड़ा गया। उत्तर प्रदेश और दिल्ली पं. दीनदयाल जी ने अपने पास रखा। उन्होंने आगे लिखा है कि भारतीय संविधान की धारा 370 में प्रावधान था कि कोई व्यक्ति सरकार से प्रमिट लिए बिना जम्मू कश्मीर में प्रवेश नहीं कर सकता और वहां पर उनका अपना संविधान और अपना झंडा और अपना प्रधानमंत्री रहेगा।
इसके खिलाफ ८ मई १९५३ को जम्मू-कश्मीर के अंदर बिना प्रमिट जाने का निर्णय लिया गया। डॉ. मुखर्जी इनके खिलाफ आंदोलन करने के लिए दिल्ली से पठान कोट के लिए पैसेंजर टे्रन से निकले। उनके साथ अटल बिहार वाजपेयी , बलराज मधोक, टेकचंद जी गुरुदत्त जी और कुछ पत्रकार भी टे्रन में साथ आये। टे्रन गाजियाबाद रेलवे स्टेशन पर जब पहुंची तो उनके स्वागत के लिए जनसैलाब उमड़ा।
उनके स्वागत के लिए स्टेशन पर श्री मनमोहन वैद्य, श्री कृष्ण मित्र, डॉ. ओमप्रकाश जोशी, श्री दयाल जी गोगिया (श्री मनोहर लाल गोगिया जी के बड़े भाई), डॉ. ब्रजलाल मेहरा, बुधप्रकाश जी गर्ग (वेदप्रकाश खादी वालों के पिताजी), हीरालाल गोयल (मनमोहन गोयल जी के पिता सहित), बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे और उसके बाद टे्रन रवाना हुई। इस खुलासे से ये बात साफ है कि गाजियाबाद के लोग हमेशा राष्टï्र के लिए समर्पित रहते हैं।