गाजियाबाद (युग करवट)। पुस्तक विमोचन समारोह में उस समय कवि सम्मेलन जैसा दृश्य बन गया जब संचालन कर रहे पत्रकार एवं कवि राज कौशिक ने शायरी के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की। दरअसल राजनाथ सिंह ने सभागार में सीट पर बैठते हुए सबसे पहले ये वाक्य कहा था कि अरे, यहां तो पूरा गाजियाबाद उपस्थित है। इस पर राज कौशिक ने गाजियाबाद की तरफ से ये शेर सुनाते हुए कार्यक्रम की शुरुआत की-बंजारे हैं रिश्तो की तिजारत नहीं करते,
हम लोग दिखावे की मोहब्बत नहीं करते।
राज कौशिक ने कहा, चूंकि इस समय हम राजनाथ सिंह के साथ उपस्थित हैं, इसलिए पूरी दुनिया के लिए दूसरा शेर है।
मिलना है तो आ जीत ले मैदान में हमको,
हम अपने कबीले से बगावत नहीं करते।
राजनाथ सिंह को उदबोधन के लिए आमंत्रित करते हुए उनकी शान में पढ़े गए इन दो शेर पर भी सभागार में देर तक तालियां गूंजती रहीं।
शाखों को तुम क्या छू आए, कांटों से भी खुशबू आए,
देखें और दीवाना कर दें, शायद उनको जादू आए।