भाजपा में अब उठने लगी है नई आवाज
गाजियाबाद (युग करवट)। देश में जेन जी को लेकर बहुत माहौल गरम है और रातों-रात जेन जी चर्चा में आ गये। इतना ही नहीं केंद्र सरकार को जेन जी के आगे अपने फैसले भी बदलने पड़ रहे हैं। अब जेनजी को लेकर सरकारी दफ्तरों में भी हडक़ंप है।
शासन-प्रशासन और सरकार में जेन जी को लेकर हमेशा चर्चाएं रहती है। जेनजी के बाद जेनअल्फा भी अपनी मांगों को लेकर सडक़ों पर आ चुका है। जेनअल्फा ने भी स्कूलों की मांग को लेकर प्रशासन की नींद हराम कर दी। जेन जी और जेनअल्फा को लेकर जिस तरह सरकार गंभीर है अब भाजपा में भी एक नई चर्चा शुरू हुई है और उसका नाम जेन-70 यानि 70 साल के जो भाजपा नेता है वो जेन-70 के नाम पर अपनी बात सरकार के सामने रखने पर विचार कर रहे हैं। जेन-७0 वाले नेताओं का कहना है कि ये देश ६५ प्रतिशत वाला युवाओं का देश है लेकिन इसका मतलब ये नहीं है ३५ प्रतिशत जेन-७0 वालों को नजरअंदाज कर दिया जाए। इसलिए अब जेन-७0 के लोग अपने अधिकारों के लिए आवाज बुलंद करेंगे। चर्चाओं के अनुसार इसको लेकर भाजपा के अंदर जेन-७0 से जुड़े लोगों ने अपनी बात हाईकमान तक पहुंचाने की तैयारी भी शुरू कर दी है। आने वाले कुछ समय में जेन-70 से जुड़े लोग भाजपा संगठन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी अपनी बात रखेंगे। इसमें ऐसे लोग हैं जो पूर्व मंत्री हैं, संगठन के पूर्व पदाधिकारी है और विभिन्न पदों पर वो रह चुके हैं लेकिन अब उन्हें कोई जिम्मेदारी नहीं दी जा रही है जबकि उनके पास एक लंबा अनुभव है और इस अनुभव का लाभ संगठन को लेना चाहिए। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जेन-70 का कहना है कि उन्हें भी कोई ना कोई जरूर जिम्मेदारी दी जाए। जब जेनजी और जेनअल्फा के सामने सरकार नतमस्तक है तो फिर वो भी अपनी बात पुरजोर तरीके से रखेंगे। आपको याद होगा कि भाजपा में 75 पार का एक नारा दिया गया था कि 75 के लोगों को साइड पोस्टिंग दी जाएगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ और आज भी कुछ लोग इतनी उम्र पार कर चुके हैं फिर भी वो अपने पदों पर बने हुए हैं। इसलिए ये फॉर्मूला सभी पर लागू होना चाहिए और इसी कारण जेन-70 अपनी बात को रखने के लिए तैयारी कर रहे हैं। वहीं अभी हाल ही में भाजपा के राष्टï्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दो दिवसीय दौरे पर मेरठ और सहारनपुर आये थे। उन्होंने मेरठ में और सहारनपुर में पूर्व पदाधिकारियों, पूर्व सांसदों और पूर्व जनप्रतिनिधियों से मुलाकात की थी। सूत्रों के अनुसार ये मुलाकात भी केवल बस मुलाकात ही रह गई किसी को बोलने का मौका नहीं दिया गया। सहारनपुर में तो पूर्व जनप्रतिनिधयों का केवल नाम लिया गया बाकी उनका कोई भी अनुभव नहीं मालूम किया गया और ना ही किसी को ज्यादा समय तक बोलने का मौका दिया। बस सबकुछ एक औपचारिकता के तौर पर ही रहा गया। अब एक बार फिर जेन-७० के बैनर तले अपनी बात रखने की चर्चाएं हैं। अब देखना है कि कितने लोग जेन-७० से जुड़ते हैं या केवल शगूफा ही रह जाएगा।