विधानसभा चुनाव २०२७
गाजियाबाद (युग करवट)। अगर चर्चाओं पर भरोसा करें तो उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव २०२७ से पहले यानि इसी दिसंबर में कराये जा सकते हैं। भाजपा ने अंदरखाने दिसंबर को ध्यान में रखते हुए तैयारियां भी शुरू कर दी है। हालांकि विपक्ष भी दिसंबर में ही चुनाव मानकर अपनी तैयारी कर रहा है। इस बार विधानसभा चुनाव सभी दलों के लिए अहम है।
खासकर सपा और भाजपा के लिए ये चुनाव करो या मरो वाला है। वहीं गाजियाबाद की बात करें तो यहां सभी सीटों पर भाजपा के उम्मीदवार जीते हुए हैं। लेकिन २०२७ के विधानसभा को लेकर बात करें तो जनप्रतिनिधियों के बीच बहुत सियासी दूरियां बढ़ गई है। कई बार देखा गया है कि एक मंच पर बैठे जनप्रतिनिधि हाथ मिलाना तो दूर नमस्ते और राम-राम भी नहीं करते। ये अपने आप में अच्छा संकेत नहीं है। पूर्व जनप्रतिनिधि भी वर्तमान जनप्रतिनिधियों के खिलाफ ताल ठोककर मैदान में हैं। सबसे ज्यादा साहिबाबाद और शहर की सीट को लेकर लोगों के बीच दूरियां दिखाई दे रही हैं। अभी हाल ही में एक कैबिनेट मंत्री के स्वागत समारोह में संगठन के एक बड़े पदाधिकारी और एक विधायक के बीच जो दूरियां देखी गई उसको सभी ने नोट किया। मंच पर दो विधायक थे। एक विधायक से नमस्ते भी हुई, उनकी सराहना भी की, लेकिन संगठन के बड़े पदाधिकारी ने उनसे हाथ भी नहीं मिलाया। दरअसल, शहर सीट को लेकर ज्यादा माहौल पेचीदा है। साहिबाबाद सीट को लेकर भी माहौल थोड़ा गरम है। शहर सीट से विधायक संजीव शर्मा को सांसद अतुल गर्ग का पूरी तरह से आशीर्वाद प्राप्त है। यही कारण है कि संजीव शर्मा पूरी तरह से आश्वस्त हैं कि पार्टी उन्हें एक बार फिर मौका देगी। इसमें कोई दोराय नहीं संजीव शर्मा उप चुनाव जीते थे और उनका कार्यकाल ढाई साल के आसपास है लेकिन इस बीच उन्होंने जिस तरह से विकास कार्य कराये, जनता दरबार लगाये, हरेक के साथ दुख-सुख में खड़े हुए और हर वक्त वो सबके लिए मौजूद हैं ये उनकी सबसे बड़ी उपलब्धी है और लोग भी चाहते हैं कि संजीव शर्मा ही रिपीट हो लेकिन भाजपा में मेहनत से ज्यादा सेटिंग देखी जाती है। वहीं हमेशा शहर सीट से वैश्य समाज की भागेदारी रही है। इस बार महानगर अध्यक्ष मयंक गोयल शहर सीट से प्रबल दावेदार हैं। हालांकि वो खुद हमेशा इनकार करते हैं लेकिन वैश्य समाज की आवाज है कि मयंक गोयल को इस बार विधानसभा का टिकट मिलना चाहिए। दरअसल मयंक गोयल की जो कार्यप्रणाली है वो काफी सराहनीय है। अब तक जितने भी कार्यक्रम हुए हैं वो काफी सफल हुए हैं। संगठन के मंत्री से लेकर महामंत्रियों की बात हो या मंडल अध्यक्षों की बात हो मयंक गोयल सबको साथ लेकर चल रहे हैं। इसलिए उनकी दावेदारी से भी इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन पार्टी इस बार ब्राह्मïणों को ज्यादा खुश करने के लिए कुछ भी कर सकती है। क्योंकि ब्राह्मïण समाज थोड़ा नाराज चल रहा है। वहीं साहिबाबाद सीट पर भी एक मजबूत ब्राह्मïण अपनी दावेदारी कर रहे हैं। लेकिन सुनील शर्मा की वर्किंग उनका व्यवहार सभी के सामने है। योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री होने के बाद वो हरेक के साथ हमेशा खड़े नजर आते हैं। उनकी विनम्रता लोगों को काफी भाती है। वहीं एक पूर्व सांसद आजकल फुल फॉर्म में है और उनके फुलफॉर्म होने के बाद कई जनप्रतिनिधि परेशान भी हैं। वहीं महापौर सुनीता दयाल की बेबाकी और उनकी वर्किंग से भी उन्हीं की पार्टी के लोग भी परेशान हैं क्योंकि वो जो सही होता है वही करती हैं किसी की सिफारिश नहीं मानती। कई सौ करोड़ रुपए की जमीन उन्होंने मुक्त कराई है। यही कारण है कि उनकी बेबाकी और उनके एक्शन से पार्टी के कुछ लोग परेशान हैं लेकिन मेयर को जो करना है वो करती हैं। बहरहाल विधानसभा चुनाव को लेकर चल रही खींचातानी क्या असर दिखाएगी ये तो आने वाला समय ही बताएगा।