नगर संवाददाता
गाजियाबाद (युग करवट)। स्वास्थ्य कर्मियों से हुई मारपीट की घटना में कार्रवाई न होने से नाराज जिला अस्पताल के डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, नर्स, फार्मासिस्ट सहित अन्य स्टाफ ने आज से हड़ताल शुरू कर दी।
अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड के सामने ही डॉक्टर-नर्स सहित अस्पताल का पूरा स्टाफ धरने पर बैठ गया है और आरोपी महिला के खिलाफ गिरफ्तारी की मांग कर रहा है। करीब चार घंटे तक अस्पताल का स्टाफ हड़ताल पर रहा। मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों ने आज शाम तक आरोपी की गिरफ्तारी किए जाने का आश्वासन दिया जिसके बाद हड़ताल को स्थगित कर कामकाज शुरू किया गया।
आठ जुलाई को जिला अस्पताल में भर्ती अरविंद मिश्रा की पत्नी ने डयूटी पर मौजूद स्टाफ नर्स हिना विक्टर, दीपा और अलका के साथ मारपीट की थी। इस मामले में नर्सो का कहना है कि मरीज के बिस्तर पर पत्नी लेटी हुई थी, सुबह उसे वहां से उठने को कहा गया, इसी बात पर वह भडक़ उठी और अभ्रद व्यवहार करने लगी, उसे रोकने पर उसने तीनों के साथ मारपीट कर दी। इस मामले में पीडि़त और सीएमएस की ओर से पुलिस को शिकायत दी गई थी। अस्पताल के सीएमएस डॉ.राकेश कुमार ने बताया कि घटना के चार दिन बाद पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज की लेकिन अभी तक आरोपी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। यह पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। अस्पताल प्रबंधन ने कहा कि जब तक इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाएगी,तब तक हड़ताल जारी रहेगी। इस दौरान सिर्फ इमरजेंसी विभाग खुलेगा, बाकी ओपीड़ी, पैथोलॉजी लैब, एक्सरे, अल्ट्रासाउंड आदि सब बंद रहेगा। हड़ताल की सूचना पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों ने अस्पताल प्रबंधन से वार्ता की और आरोपी महिला की गिरफ्तारी शाम तक करने के आश्वासन दिया।
आश्वासन के बाद सभी स्टाफ काम पर लौट गया और ओपीड़ी आदि शुरू की गई। हड़ताल खुलने से वहां मौजूद मरीजों ने भी राहत की सांस ली। हालांकि अस्पताल प्रबंधन ने चेतावनी दी है कि अगर आश्वासन के बाद भी गिरफ्तारी नहीं की गई तो सोमवार से फिर से हड़ताल की जाएगी।
हड़ताल से चार घंटे तक बेहाल हुए अस्पताल पहुंचे मरीज
गाजियाबाद (युग करवट)। जिला अस्पताल में अचानक हुई इस हड़ताल से मरीजों में हडक़म्प मच गया। सुबह से ही मरीज रजिस्टे्रशन काउंटर पर पर्ची बनवाने की लाइन में लग गए थे। कुछ मरीजों की पर्ची बना दी गई थी, लेकिन इसके बाद हड़ताल होने के बाद पंजीकरण काउंटर बंद कर दिया, लेकिन मरीज पर्ची बनने के इंतजार में लाइनों में लगे रहे। यही हाल ओपीड़ी का भी था। ओपीड़ी में भी मरीज लाइनों में लगे हुए थे, लेकिन डाक्टर अपने ओपीडी कक्ष में मौजूद नहीं थे। यही हाल पैथोलॉजी लैब और एक्सरे कक्ष का भी था, जहां मरीज जांच कराने के लिए पहुंचे थे। लेकिन यहां से भी उन्हें हड़ताल कहकर जांच नहीं की गई। हालांकि चार घंटे बाद ही हड़ताल को स्थगित कर दिया गया जिसके बाद मरीजों का इलाज आदि शुरू किया गया।