इतिहास गवाह है
प्रदेश में जब भाजपा भी की सरकार रही हमेशा सरकारी मशीनरी हावी रही। गैरभाजपाई सरकारों में नेता हमेशा अफसरों पर भारी रहे हैं। इतिहास गवाह है कि जब भी भाजपा की सरकार रही अफसरों की वजह से कहीं ना कहीं जनता में सही संदेश नहीं गया। जब अफसर नेताओं की, कार्यकर्ताओं की और जनता की नहीं सुनेंगे, उनका अच्छा व्यवहार नहीं होगा तो सीधा लोग सरकार को ही जिम्मेदार ठहराते हैं। उत्तर प्रदेश में जब-जब भाजपा की सरकारें रहीं तब इसी तरह की तस्वीर दिखाई दी। पहले सोशल मीडिया नहीं था तब बातें छुप जाया करती थी लेकिन आज सोशल मीडिया इतना एक्टिव है कि पल भर में सारी तस्वीरें सामने आ जाती है। मुझे याद है कि बसपा की सरकार थी उस जमाने में जो अफसर तैनात होते थे उनकी भी सीधी पहुंच मुख्यमंत्री तक होती थी लेकिन वो जनता के लिए हमेशा मौजूद रहते थे। कार्यकर्ताओं की सुनवाई करते थे, एक बड़े अधिकारी से जब ये मालूम किया गया कि आप बहुत मजबूत पकड़ है, बहनजी आपको सीधा जानती है, उन्हीं ने आपकी पोस्टिंग की है फिर आप ऑफिस में इतना टाइम क्यों देते हैं, कार्यकर्ताओं की क्यों सुनते हैं, आम जनता के लिए आपके दरवाजे खुले रहते हैं तो उनका बड़ा सटीक जवाब था, उन बड़े अधिकारी ने कहा कि आज हम इस बड़ी सीट पर इसलिए बैठे हैं कि यूपी में बहनजी मुख्यमंत्री हैं। अगर हम ही काम नहीं करेंगे तो सरकार की बदनामी होगी फिर हमें क्या फायदा, हमारी वर्किंग से ही बहनजी की सरकार की सराहना होगी, इसलिए भले ही हमारी सीधी पहुंचे हो लेकिन हमें अपनी बहनजी सरकार को ही मजबूती देना है। ऐसी सोच अब नहीं है। भाजपा सरकार में अफसरों की ही कार्यप्रणाली से सरकारों पर सवाल उठते हैं इसलिए सरकार को भी चाहिए कि वे संज्ञान लें कि किसकी वजह से प्रदेश में माहौल खराब हो रहा है। जय हिंद