कांग्रेस को चाहिए अपने नेताओं पर लगाये पाबंदी
गाजियाबाद (युग करवट)। विधानसभा चुनाव को लेकर कांगे्रस और सपा के बीच गठबंधन की बात पर जिस तरह कांगे्रस और सपा के कुछ नेता बयानबाजी कर रहे हैं उसका संदेश आम कार्यकर्ताओं में अच्छा नहीं जा रहा है। हालांकि सपा का हाईकमान हो या कांग्रेस का हाईकमान वो गठबंधन को लेकर गंभीर है और अखिलेश यादव भी कई बार इस बात का संकेत दे चुके हैं कि गठबंधन था गठबंधन है और गठबंधन रहेगा। अगर देखा जाए तो दोनों दलों की मजबूरी है गठबंधन करना। लेकिन स्थानीय स्तर के नेतागण अपनी निजी राजनीति को लेकर जो बयानबाजी कर रहे हैं उसका अच्छा संकेत नहीं जा रहा है।
सहारनपुर से कांगे्रस के सांसद इमरान मसूद लगातार बीच-बीच में सपा को लेकर जो बयानबाजी करते हैं या सपा प्रमुख अखिलेश यादव को लेकर जिस तरह से अपनी बात रखते हैं उसका अच्छा संकेत नहीं जा रहा है। कांगे्रस एक राष्टï्रीय पार्टी है और उसके सांसद का बयान भी काफी गंभीरता के साथ ही आना चाहिए। पार्टी को भी चाहिए कि वो ऐसे बयानबाजी करने वाले अपने नेताओं पर लगाम लगाये क्योंकि फिर हाईकमान कुछ रहेगा ही नहीं। अगर स्थानीय स्तर पर बयानबाजी होने लगी तो फिर राष्टï्रीय पार्टी का क्या महत्व रहेगा। राजनीतिक गलियारों में ये चर्चा है कि इमरान मसूद को ये बात नहीं भूलना चाहिए कि २०२४ के लोकसभा चुनाव में जो उनको जीत मिली है वो उसी गठबंधन की बदौलत ही मिली है। यदि गठबंधन नहीं होता तो २०१९ वाला ही परिणाम होता। कांगे्रस एक राष्टï्रीय पार्टी है उसके बाद नेताओं की फौज भी है और बहुत मंझे हुए नेता भी हैं इसलिए कांगे्रस हाईकमान की जिम्मेदारी बनती है कि उनके यहां से जो भी बयान निकले उसका गलत संदेश ना जाए। समाजवादी पार्टी में तो सबकुछ राष्टï्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ही है और वही पूरे संगठन को लेकर आज राजनीति कर रहे हैं और उन्हीं की बदौलत आज सपा एक मजबूत स्थिति में है और गठबंधन की वजह से ही आज देश में समाजवादी पार्टी तीसरी बड़ी पार्टी है। इसमें कोई दोराय नहीं २०२४ के लोकसभा चुनाव में अखिलेश यादव ने जिस तरह अपनी चुनावी रणनीति से उम्मीदवार उतारे और जीत हासिल की और देश में तीसरे नंबर की बड़ी पार्टी और उसकी कार आज देश के लोग समाजवादी पार्टी को याद करते हैं। आज उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी का विकल्प समाजवादी पार्टी है इससे भी इनकार नहीं किया जा सकता। कांगे्रस उत्तर प्रदेश में कोई भी करिश्मा अपने दम पर नहीं दिखा पायी है। कई सालों से वो सत्ता से दूर है और जितनी मजबूती के साथ उसको चुनाव मैदान में अपना प्रदर्शन करना चाहिए था वो नहीं कर पा रही है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव की ओर से कोई भी बयान गठबंधन को लेकर कांगे्रस के विरोध में नहीं आया है लेकिन कांगे्रस के नेताओं की तरफ से जो बयानबाजी चल रही है वो ठीक नहीं है और उस पर हाईकमान को पाबंदी लगाना चाहिए। क्योंकि देश में गठबंधन की राजनीति का दौर चल रहा है इसलिए सभी को गठबंधन धर्म निभाना चाहिए।