गाजिायबाद (युग करवट)। कावंड़ व्यवस्था को लेकर जो दावे किये जा रहे थे वो सच्चाई से बहुत दूर हैं। 5 अगस्त से डायवर्जन होना था जो दो दिन पहले ही 3 अगस्त को कर दिया गया। गाजियाबाद में कमिश्नरेट व्यवस्था लागू होने के बाद प्रथम पुलिस आयुक्त के रूप में अजय मिश्रा की तैनाती हुई थी। उनके कार्यकाल में कांवड़ यात्रा हुई थी, लाखों की संख्या में शिवभक्त गाजियाबाद आये थे। पूरी व्यवस्था की कमान अजय मिश्रा ने खुद संभाल रखी थी। ऐसा पहली बार हुआ था कि जब कोई जिला पुलिस प्रमुख दूधेश्वरनाथ मंदिर में गर्भ$गृह में मौजूद रहकर व्यवस्था को संभाल रहा था और हर शिवभक्त को आसानी से जलाभिषेक का अवसर दिला रहा था। गर्भगृह में आज तक कभी भी पुलिस प्रमुख मौजूद नहीं रहे लेकिन अजय मिश्रा ने इस तरह की व्यवस्था करके एक नई इबारत लिखी थी। यही कारण था कि शहर कहीं जाम नहीं हुआ, समय से पहले कोई डायवर्जन हुई और ना ही शहर कैद हुआ। आज जलाभिषेक से दस दिन पहले ही सारे रास्ते बंद कर दिये गये। पुलिस कमिश्नरेट में इतनी फोर्स है, अधिकारियों की फौज है उसके बावजूद भी व्यवस्थाओं पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। सडक़ हादासों में जिस तरह शिवभक्तों की जान जा रही है वो भी बड़ा सवाल है। देखा जा रहा है कि केवल व्यवस्था के नाम पर आम लोगों को परेशानी में डालकर अपने आप को किस तरह सुरक्षित रखा जाए इस पर ही काम चल रहा है। शहर में लोग परेशान रहे इससे किसी को कोई मतलब नहीं है। जबकि सबसे बड़ी जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन की ये भी है कि कांवड़ यात्रा भी सकुशल सम्पन्न हो, शिवभक्तों को कोई परेशानी ना हो लेकिन शहर के लोग भी आसानी से आ जा सके, उन्हें भी किसी तरह की कोई परेशानी ना हो। शहर को कैद करने के बाद भी व्यवस्था ठीक नहीं है इस पर ध्यान देने की जरूरत है।