चर्चा-ए-आम
क्या भारत की राजनीति में अगले कुछ दिनों या महीनों में कोई बड़ा परिवर्तन होने जा रहा है द्य इसकी चर्चा देश के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों बड़ी तेजी से चल रही है द्य कांग्रेस के नेता लोकसभा में विपक्ष के लीडर राहुल गांधी ने अपने एक सार्वजानिक बयान में यह कहा है कि देश राजनीतिक तौर पर असामान्य परिस्थितियों से गुजर रहा है और भारत में कभी भी कोई बड़ी असामान्य राजनीतिक घटना घटित हो सकती है। इसी तरह उत्तर प्रदेश में समाज वादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने भी ऐसा ही एक बयान दिया है कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश में जो विधान सभा चुनाव होने जा रहें हैं वो संभवत: देश के लोकतांत्रिक ढांचे में आखरी आम चुनाव ही होगा और इसके बाद समस्त राजनीतिक ढांचा ही बदल जायेगा द्य इसके साथ ही चुनावी प्रक्रिया भी बदल जाएगी। विपक्षी दलों के कई नेताओं के साथ-साथ देश के कई प्रमुख राजनीतिक विश्लेषक भी कुछ राष्ट्रीय टीवी चेंनलो पर होने वाली राजनीतिक बहस में यह कहते नजऱ आ रहें हैं कि 2029 के लोक सभा चुनाव से पहले भाजपा किसी भी सूरत में ऐसी परिस्थियाँ बना लेगी की जिसके चलते वो देश के आम चुनाव से पहले नए परिसीमन रेखांकित कर अपनी सुगमता के अनुसार सीटों के क्षेत्रों का विभाजन करा लेगी।
यह भी कहा जा रहा है कि इससे आने वाले समय के सभी चुनाव उसकी सुगमता अनुसार हो पाएंगे। कुछ राजनीतिक विशेषज्ञों का ऐसा आंकलन भी है की 2029 के लोक सभा चुनाव से पहले केंद्र में शासित सत्ता दल पुरे भारत में ही एक देश एक चुनाव का कानून बनवा कर अपनी सुविधा अनुसार नये परिसीमानों के मुताबिक लोग सभा के चुनाव करवाएगी। ऐसा करने के लिए भाजपा को लोक सभा में 368 सांसदों की आवशयकता होगी और वर्तमान में पश्चिम बंगाल से टूटे टीएमसी के 20 सांसदों को मिलाकर अभी उसके पक्ष में सांसदों की संख्या 318 हो गयी है और अभी उसे सविंधान परिवर्तन के लिए 50 और सांसदों की आवशयकता है द्य राजनीतिज्ञ विशेषज्ञ मानते है की भाजपा ऐसा करने में सक्षम है और सुगमता से अपना लक्ष्य प्राप्त कर सकती है। झारखांड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पार्टी सहित शरद पवार और उद्धव ठाकरे की पार्टी के सांसद किसी भी समय भाजपा का दामन थाम समते हैं। ऐसे ही ‘ऑपरेशन लोटस’ समाज वादी पार्टी के साथ साथ आरएलडी और कांग्रेस पार्टी में भी बड़ी उथल-पुथल करके अच्छी खासी संख्या में उनके सांसदों को भी भजपा में शामिल करवाया जा सकता है। लिहाज़ा विपक्ष की मौजूदा कमजोर और अस्थिर परिस्थियों के बीच भाजपा को 368 सांसदों की संख्या पूरी करने में बोहोत अधिक जोर नहीं लगाना होगा। यदि ऐसा हो गया तो कुछ भी संभव है और हमें देश में उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव के बाद कोई भी बड़ा राजनीतिक खेला देखने को मिल सकता है।