अब आरएसएस अगले माह से संभालेगा कमान
गाजियाबाद (युग करवट)। भाजपा विधानसभा चुनाव को लेकर जहां तीन चरणों में उत्तर प्रदेश की क्या स्थिति है और भाजपा के प्रति क्या माहौल है सर्वे करा चुका है, इस सर्वे में भी माहौल ठीक नहीं आया है। दो सर्वे नवंबर माह में किये जाएंगे वहीं आरएसएस भी अपने स्तर पर उत्तर प्रदेश के लोगों का मूड भाजपा के प्रति क्या है इसको लेकर सर्वे करा रहा है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आरएसएस के सर्वे में भी भाजपा को उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में १६५ से लेकर १७५ सीटें ही आयी हैं। जबकि कांगे्रस और सपा को २१५ से लेकर २३५ तक सीटें बताई गई है। इस सर्वे के बाद आरएसएस में भी चिंता दिखाई दे रही है। दरअसल, आरएसएस के बिना कोई भी चुनाव भाजपा के लिए जीतना आसान नहीं है। इसमें कोई दोराय नहीं कि आरएसएस को लेकर आज भी लोगों के मन हमेशा अच्छी राय रहती है। भले ही लोग कुछ कहते रहे लेकिन इसमें कोई दोराय नहीं है राष्टï्र के प्रति समर्पण की भावना आरएसएस में साफतौर पर दिखाई देती है और आज दो सीटों से लेकर सत्ता तक की चाबी आरएसएस की बदौलत ही भाजपा को मिली है।
लोकसभा चुनाव २०२४ से पहले भाजपा के राष्टï्रीय अध्यक्ष रहे जेपी नड्डा ने एक बयान में कहा था कि अब भाजपा को आरएसएस की जरूरत नहीं है और खुद मजबूत स्थिति में है। इस बयान का ये असर आया कि भाजपा ने चार सौ पार का दावा किया और भाजपा बहुमत तक हासिल नहीं कर पायी और आज बैसाखियों की सरकार केंद्र में है। इसलिए आरएसएस के बिना भाजपा अगर सरकार बनाने का सपना देखती है तो ये बिल्कुल बेमानी होगी क्योंकि आरएसएस ही भाजपा संकट मोचन है और एक बार नहीं कई बार हारता हुआ चुनाव संघ की बदौलत जीता गया है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आरएसएस ने अभी हाल ही में सर्वे कराया है जिसमें उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार तीसरी बनने की कम उम्मीद आयी है। सर्वे में १६५ से लेकर १७५ तक सीटें भाजपा की बताई गई है जबकि इंडिया गठबंधन यानि कांगे्रस और समाजवादी पार्टी गठबंधन को यूपी में २१५ से लेकर २३५ तक सीटें बताई गई हैं। अगर आप २०२४ के लोकसभा चुनाव पर नजर डालें तो समाजवादी पार्टी ने २७५ सीटों पर जीत दर्ज कराई थी जाहिर है अगर कुछ सीटें कम भी कर दो तो आज सपा गठबंधन को बहुमत से अधिक सीटों की तरफ उसका पलड़ा भारी है। आरएसएस के सर्वे के बाद अब संघ उत्तर प्रदेश को लेकर अपनी बैठकें करेगा। सूत्रों ने बताया कि अगले माह से संघ उत्तर प्रदेश मिशन को लेकर मंथन शुरू करेगा और भाजपा के प्रति माहौल को और मजबूत करेगा ताकि तीसरी बार भाजपा सरकार यूपी में रिपीट हो सके। संघ के बिना भाजपा की जीत नामुमकिन है ये बात अब अच्छी तरह से दिल्ली वालों को भी समझ में आ गयी है।