गाजियाबाद (युग करवट)। श्री कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम् ने कहा कि अब श्रद्घांजलि सभाओं में श्रद्घा कम दिखाई देती है बल्कि भोजन का आनंद पर चर्चा ज्यादा होती है। एक श्रद्घांजलि सभा में पहुंचे आचार्य प्रमोद कृष्णम् ने बहुत ही दिल को छूने वाली बातें कहीं। उन्होंने कहा कि ये सत्य है कि जो आया है वो जाएगा जरूर।
उन्होंने कहा कि आज जिसकी तस्वीर लगी है कल इस स्थान पर हमारी भी तस्वीर लगी होगी। लेकिन अफसोस इस बात का है कि अब श्रद्घांजलि सभा में या शोकसभाओं में ऐसे दृश्य दिखाई देते हैं जिससे लगता ही नहीं है कि हम शोक व्यक्त करने आये है। अब केवल भोजन पर चर्चा होती है, भोजन के आनंद पर चर्चा होती है इससे ज्यादा कुछ नहीं होता। उन्होंने कहा कि अगर कोई 80 साल में जाता है तो कहा जाता है कि उनकी उम्र पूरी हो गई और लंबे जिये। उन्होंने कहा कि कितने हैरत की बात है कि हमारे साथ रहने वाला व्यक्ति चला गया और हम केवल औपचारिकता के लिए ही आते हैं। उसके जीवन पर कोई चर्चा नहीं होती। बस अब केवल और केवल सबकुछ दिखावा ही रह गया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति जाएगा ये सभी को पता है, हम भी जाएंगे ये सभी को पता है, लेकिन जो इंसान जाता है और जो दुख होता है उसी को बांटने के लिए हम सब इकट्ठा होते हैं। भगवान राम भी जब उनके पता राजा दशरथ नहीं रहे तो वो भी फूट-फूटकर रोये तब उनसे कहा गया कि आप मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम हैं आप रोयेंगे तो फिर क्या होगा।
आचार्य प्रमोद कृष्णम् ने कहा कि जब भगवान श्रीराम को दुख हो सकता है तो हम तो कुछ भी नहीं है। लेकिन अफसोस ये है कि जो श्रद्घांजलि सभाओं में जो माहौल दिखाई देता है वो कहीं नहीं लगता कि हम दुख व्यक्त करने आये या किसी के दुख में शामिल होने आये हैं। स्व. महेंद्र सिंह की श्रद्घांजलि सभा में अपने विचार व्यक्त करते हुए आचार्य प्रमोद कृष्णम् ने कहा कि गाजियाबाद के बहुत से बिल्डरों को महेंद्र सिंह चौहान ने अर्श से फर्श तक पहुंचाया लेकिन आज शोकसभा वो एक भी चेहरा नहीं है। ये समाज का बदलाव ठीक नहीं है ये मानवता के लिए भी एक बड़ा संदेश है। उन्होंने कहा कि हमें शोकसभाओं में संकल्प लेना चाहिए कि जाने वाला यदि हमसे नाराज था तो वो हमें माफ कर दे या हम उससे नाराज थे तो हम उसे माफ कर दे यही सबसे बड़ी सच्ची श्रद्घांजलि होगी।