नोएडा (युगकरवट) लंबे रूट के साथ रोजमर्रा की आवाजाही में इस्तेमाल हो रही सिंगल और डबल डेकर बसों में कमाई बढ़ाने के लिए सीटों की संख्या बढ़ाने का खेल चल रहा है। एक ट्रांसपोर्टर के अनुसार, बस की मूल बॉडी और स्वीकृत सिटिंग लेआउट के साथ छेड़छाड़ कर, कहीं 6 तो कहीं 10 अतिरिक्त सीटें संचालक लगवा रहे हैं। इससे संचालक स्वीकृत क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाने की व्यवस्था कर अतिरिक्त कमाई कर रहे है। उनके अनुसार स्वीकृत सिटिंग ले-आउट में परिवर्तन कर केवल अतिरिक्त सीट लगाने तक सीमित नहीं है। बस के अंदर सीटों का लेआउट बदलने से यात्रियों के आवागमन के लिए उपलब्ध जगह भी प्रभावित होती है। साथ ही आपातकालीन निकास या यात्रियों के उतरने-चढऩे के रास्ते में बदलाव किया जा रहा है। डबल डेकर बसों में संचालक पांच सीट के स्लीपर को परिवर्तित कराकर छह सीट लगवा रहे हैं।
निर्धारित डिजाइन में छेड़छाड़ कर आगे और पीछे की तरफ अतिरिक्त स्लीपर लगाने का खेल चल रहा है।
इसी तरह से सिंगल डेकर बसों में आगे की ओर चार सीट और पीछे की ओर छह अतिरिक्त सीटें लगाकर मानक के लेआउट से खिलवाड़ किया जा रहा है। इस दौरान बसों में बने हुए कंपनी के आपातकालीन द्वार सीट के कारण बंद कर दिए जाते हैं और जब हादसे होते हैं, तो यात्रियों को निकलने तक की जगह नहीं मिलती है। ऐसे में जान तक गंवानी पड़ती है।