बलदेव राज शर्मा की पुस्तक ‘मेरे संस्मरण मेरी धरोहर’ के हवाले से
गाजियाबाद (युग करवट)। गाजियाबाद में राजनीति के मैदान में देश के धुरंधर लोगों का आना जाना रहा है। देश के कई बड़े नेता गाजियाबाद में आते जाते रहे हैं। बलदेव राज शर्मा की किताब में खुलासा किया गया है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद जब पहली बार कल्याण सिंह गाजियाबाद आये उन्होंने बलदेव राज शर्मा को बुलाया और कहा कि कल सुबह आपके यहां जलपान करेंगे और जलपान में केवल भाभी जी तंदूरी आलू के पराठे बनाएंगी और दही के साथ वही खाये जाएंगे इसके अलावा कोई चीज नहीं बनाई जाएगी। पुस्तक में लिखा है कि कल्याण सिंह ने २४ जून १९९१ में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। मुख्यमंत्री बनने के बाद अगले वर्ष जनवरी १९९२ में मुख्यमंत्री के रूप में कल्याण सिंह पहली बार गाजियाबाद आये। तब उन्होंने बलदेव राज शर्मा को डाक बंगले बुलाया और जलपान में उक्त चीजों की व्यवस्था करने को कहा। किताब में खुलासा हुआ है कि तंदूरी पराठे की डिमांड कल्याण सिंह ने क्यों की है। इसमें लिखा है कि जलपान कार्यक्रम के पीछे भी एक ऐतिहासिक घटना है। वो ये है कि १९७५ में जब आपातकाल लगा था और गाजियाबाद से उन्हें एवं दिनेश चंद गर्ग और तेलूराम कम्बोज को गिरफ्तार करके मेरठ जेल में बंद कर दिया गया था तो मेरे निवास से पुलिस का पहरा हटा दिया गया और गिरफ्तारियां नहीं होगी और भूमिगत रहकर ही पार्टी का काम करें। इसी व्यवस्था के अंतर्गत मेरे निवास स्थान कविनगर में कल्याण सिंह, रामप्रकाश गुप्ता, हरिश्चंद्र श्रीवास्तव जैसे प्रमुख आठ नेताओं को ठहराया गया था और सभी प्रमुख नेता १५ दिन तक कविनगर निवास पर रहे थे। इन १५ दिनों में बच्चों ने उनकी सेवा की और उनका प्यार और आशीर्वाद उन्हें मिला। जब कल्याण सिंह मुख्यमंत्री के रूप में पधारे तो उन्होंने उसी जलपाल की चर्चा की और १७ वर्ष बाद मुख्यमंत्री के रूप में कविनगर स्थित मेरे आवास पर आये बच्चों से मिले और १९७५ में प्रवास के दौरान जो नाश्ता किया था उसी की फिर फरमाईश की। इसीलिए जलपाल के पीछे भी ऐतिहासिक घटना छिपी हुई है।