राकेश जयंत
गाजियाबाद (युग करवट)। नगर पंचायत डासना को लेकर हाल ही में लगाए गए आरोपों के बाद नगर पंचायत अध्यक्ष बागे जहां का पक्ष सामने आया है। अध्यक्ष ने कहा कि नगर पंचायत पर लगाए जा रहे आरोप तथ्यों से परे हैं और विकास कार्यों को राजनीतिक चश्मे से देखने का प्रयास किया जा रहा है। बागे जहां ने बताया कि नगर पंचायत डासना के गठन के बाद सबसे पहले विकास कार्य श्रीराम कॉलोनी में लगभग 30 लाख के कराए गए थे।
यह कॉलोनी लंबे समय से मूलभूत सुविधाओं से वंचित थी जो डासना नगर पंचायत मेंबर पति द्वारा काटी गई थी। नगर पंचायत ने प्राथमिकता के आधार पर यहां रास्तों एवं अन्य आवश्यक विकास कार्यों को कराया, जिससे हजारों लोगों को लाभ मिला। श्रीराम कॉलोनी में एक नाला लगभग 60 लाख की लागत से बना है। जिसका लेवल अधिशासी अधिकारी जे.इ. द्वारा कॉलोनी की बाहर की बजाय कॉलोनी के अंदर से कर दिया है। इससे पानी बाहर निकालने की बजाय वापस कॉलोनी की तरफ जाता है। दूसरे नाले का निर्माण कार्य अभी चल रहा है। निर्माण कार्य तो बहुत समय पहले ही हो जाते परंतु मेंबर व मेंबर पति द्वारा यह कहते हुए कार्य रुकवा दिया गया कि उक्त कार्य विधायक निधि अथवा जीडीए की योजना के माध्यम से कराया जाएगा। इसके चलते प्रस्तावित कार्य आगे नहीं बढ़ सका और क्षेत्र की समस्याएं बनी रहीं। अध्यक्ष ने बताया कि वर्तमान समय में श्रीराम कॉलोनी में केवल नगर पंचायत ही नहीं बल्कि अन्य विभागों के भी महत्वपूर्ण कार्य प्रस्तावित हैं। यहां जल निगम की पाइपलाइन तथा पीएनजी गैस पाइपलाइन डाली जानी है। उन्होंने बताया कि उनके प्रयासों से डासना क्षेत्र में लगभग 3 किलोमीटर लंबी पीएनजी गैस पाइपलाइन परियोजना स्वीकृत हुई है, जिसका कार्य सबसे पहले श्रीराम कॉलोनी से शुरू किया जाना प्रस्तावित है। हालांकि पीएनजी पाइपलाइन बिछाने की प्रक्रिया में देरी होने तथा नगर पंचायत से समय पर अनापत्ति एवं अन्य औपचारिकताएं पूरी न होने के कारण कुछ विकास कार्य प्रभावित हुए हैं। अध्यक्ष ने कहा कि नगर पंचायत को विकास कार्यों के लिए शासन से धनराशि प्राप्त करने के लिए समय-समय पर मांग पत्र भेजना आवश्यक होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व में कार्यरत अधिशासी अधिकारियों द्वारा आवश्यक डिमांड समय पर नहीं भेजी गई, जिसके कारण नगर पंचायत को अपेक्षित वित्तीय सहायता नहीं मिल सकी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 में भी लंबे समय तक कोई प्रभावी डिमांड शासन को नहीं भेजी गई। इस संबंध में उन्होंने स्वयं जिलाधिकारी गाजियाबाद से शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के बाद लगभग 5 करोड़ रुपये की मांग शासन को भेजी गई, जिसके सापेक्ष नगर पंचायत को करीब 3.50 करोड़ रुपये की धनराशि प्राप्त हुई। बागे जहां ने कहा कि नगर पंचायत का उद्देश्य सभी वार्डों में बिना किसी भेदभाव के विकास कार्य कराना है।