कविनगर रामलीला समिति विवाद
गाजियाबाद (युग करवट)। कविनगर रामलीला समिति का विवाद अब शासन स्तर पर पहुंच गया है। इस मामले रजिस्ट्रार, फम्र्स सोसायटीज एवं चिट्स उत्तर प्रदेश की रजिस्ट्रार अलका वर्मा परीक्षण कर रही हैं। युग करवट के साथ हुई बातचीत में रजिस्ट्रार अलका वर्मा ने बताया कि यह मामला उनके संज्ञान में आया है, जिसका परीक्षण कराया जा रहा है। हालांकि मामला न्यायालय में भी लम्बित हैं जिसमें सम्भवत: तीन तारीखों पर सुनवाई हो रही हैं। अलका वर्मा ने कहा कि न्यायालय में मामला होने के चलते इस मामले में अभी कोई निर्णय नहीं लिया जा सकता है। हालांकि गाजियाबाद जिला प्रशासन द्वारा इस मामले में जांच कराई गई थी, उसका भी परीक्षण किया जा रहा है, ताकि इस मामले का कोई हल निकल सके। रजिस्ट्रार अलका वर्मा ने कहा कि अभी उनके स्तर पर इस मामले में कोई जांच कमेटी गठित नहीं की गई है, क्योंकि न्यायालय में वाद होने के कारण, पूरी कार्रवाई उसके निर्णय पर टिकी है। जल्द ही इस मामले में कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा। बता दें कि कविनगर रामलीला में दो समितियों के बीच विवाद चल रहा है। एक समिति विपुल शर्मा की अध्यक्षता में हैं तो दूसरी समिति रामकुमार तोमर की अध्यक्षता में हैं जिसके सरंक्षक समिति के आजीवन सदस्य व पूर्व सांसद रमेश चंद तोमर हैं। पूर्व में हुए विवाद के चलते डिप्टी रजिस्ट्रार द्वारा रामकुमार तोमर की समिति को वैध घोषित किया गया था, लेकिन कुछ दिन बाद ही डिप्टी रजिस्ट्रार ने अपने ही इस फैसले पर रोक लगा दी। इसके बाद नई समिति की जिम्मेदारी विपुल शर्मा को दी गई, इसके बाद यह विवाद और गहरा गया। पूर्व सांसद ने इस समिति को पूरी तरह से अवैध और नियमविरूद्घ बताते हुए कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना को मामले से अवगत कराते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की। इसके बाद इस मामले को रजिस्ट्रार अलका वर्मा को दिया गया। हालांकि उच्च स्तर पर इस मामले की कोई जांचकमेटी गठित नहीं हुई है। मामला न्यायालय में होने को लेकर आगे की कार्रवाई को टाल दिया गया है।