आखिरकार किसके कहने से होता है भुगतान
गाजियाबाद (युग करवट)। गाजिाबाद शहर की सबसे हाईटेक रामलीला कमेटी को लेकर जहां पूर्व सांसद डॉ. रमेशचंद तोमर शासन से लेकर हाईकोर्ट तक लड़ाई लड़ रहे हैं और उनकी लड़ाई के पीछे केवल एक ही उद्देश्य है कि धार्मिक आयोजनों के नाम पर फिजूलखर्ची ना की जाए और जो लोग रामलीला के लिए चंदा देते हैं उनके धन का दुरूप्रयोग ना हो। कल युग करवट ने अपने अंक में रामलीला कमेटी के पूर्व अध्यक्ष ललित जायसवाल के हवाले से एक खबर प्रकाशित की थी जिसमें बताया गया था कि वरदान अस्पताल को जो एक करोड़ रुपया दिया गया था वो कमेटी में ललित जायसवाल द्वारा ब्याज सहित जमा करा दिया गया। इस खबर के प्रकाशन के बाद रामलीला कमेटी के मौजूदा आजीवन सदस्य जिन्होंने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि आज भी रामलीला कमेटी में 80 लाख रुपये खड़े हैं जो जमा ही नहीं हुए हैं। उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड इस बात का गवाह है। उन्होंने ये भी बताया कि रामलीला कमेटी में लोग चंदा देते हैं और काफी चंदा आता है और उसके बाद करोड़ों रुपये मेले में ठेका देने के नाम पर आता है। जो लोग चंदा देते हैं वो केवल भगवान राम के नाम पर और धार्मिक आयोजन के लिए चंदा देते हैं इसलिए उनका पैसा कैसे अंधाधुंध तरीके खर्च किया जा सकता है। उनका कहना था कि रामलीला कमेटी के फंड से 31 लाख रुपये कोरोना में पीएम फंड में दिये गये। ये कैसे दे सकते हैं उनका ये शब्द था कि भीख मांगकर काम करने वाले कैसे भीख दे सकते हैं। उन्होंने ये भी कहा कि कविनगर रामलीला मैदान जीडीए की सम्पत्ति है यानि सरकरी सम्पत्ति है। सरकारी सम्पत्ति पर जनता के चंदे से कैसे काम कराया जा सकता है। उनका कहना था कि चार करोड़ रुपए के आसपास कविनगर रामलीला का स्टेज और जानकी भवन तैयार कराया गया। आखिरकार ये पैसा किसकी मर्जी से खर्च हुआ। सरकारी सम्पत्ति पर भवन बनाकर कैसे कमेटी बुकिंग कर सकती है। कैसे सरकारी जगह पर चार करोड़ रुपये खर्च कर दिये गये। आजीवन सदस्य का कहना था कि सरकारी सम्पत्ति पर बुकिंग कैसे की जा रही थी। उन्होंने पूर्व सांसद रमेशचंद तोमर का जिक्र करते हुए कहा कि उनके प्रयास से अब जानकी भवन की बुकिंग जीडीए कर रहा है। लेकिन सवाल ये पैदा होता है कि ये चार करोड़ रुपया सरकारी जमीन पर कैसे कर दिया गया।
…और जब सुल्लामल कमेटी
ने दिया था चंदा तो…
गाजियाबाद (युग करवट)। रामलीला कमेटी कविनगर आजीवन सदस्य का कहना है कि आज कविनगर रामलीला कमेटी में जिस तरह खर्चे हो रहे हैं और भुगवान किये जा रहे हैं और दान दिया गया था सब खामोश हैं। उन्होंने बताया कि कई वर्ष पहले राकेश गर्ग और सुभाष गर्ग ने हिंदी भवन एवं गोशाला को एक लाख रुपये का सहयोग कर दिया था इसको लेकर बहुत हो हल्ला हुआ था। जबकि श्री सुल्लामल रामलीला कमेटी किसी सरकारी जमीन पर नहीं बनी है उसके बाद भी जो चंदा का पैसा आया था उसको देने पर विवाद हुआ था। उन्होंने ये भी बताया कि आज सुल्लामल रामलीला कमेटी बाहर से कोई भी चंदा नहीं करती है और जो ठेके छूटते हैं उसी से इतना धन आ जाता है कि बाहर से चंदा लेने की जरूरत ही नहीं पड़ती और बहुत ही अच्छे तरीके से रामलीला का आयोजन होता है।