गाजियाबाद के अंबेडकर रोड स्थित जवाहर लाल नेहरू राष्टï्रीय युवा केन्द्र एक बार फिर सुर्खियों में है। कारण है स्थानीय लोगों का वह आरोप जिसमें कहा गया है कि एक जनप्रतिनिधि के प्रतिनिधि ने लोगों को नेहरू युवा केन्द्र में प्रवेश नहीं करने दिया। जबकि वह लोग नियमित रूप से केन्द्र के मैदान में टहलने तथा व्यायाम करने आते हैं। स्थानीय लोग अब से पहले भी कई बार ऐसे आरोप लगाते रहे हैं। नेहरू युवा केन्द्र को लेकर विवाद की स्थिति बनी रहती है। यह एक खेल का मैदान है, जहां खिलाड़ी अपने अभ्यास के लिए आते हैं, महिलाएं और बुजुर्ग टहलने आते हैं। लेकिन पिछले कुछ दिनों से यहां ऐसी गतिविधियां बढ़ गई हैं कि जिससे विवाद की स्थिति बन जाती है। जिन लोगों को प्रवेश करने से रोका गया उन्होंने इस बात की शिकायत सिहानी गेट थाने में भी की। हालांकि पुलिस ने कोई कार्रवाई की या नहीं इसके बारे में जानकारी सामने नहीं आई है। लेकिन यदि ऐसा हुआ है तो यह बहुत गलत हुआ है। इससे पहले वहां निर्माण कराने के आरोप भी लगे थे। खेल गतिविधियों को बाधित करने के आरोप भी सुने गए थे। एक बड़े जनप्रतिनिधि के प्रतिनिधि पर यह सारे आरोप हैं। सवाल यह भी है कि आखिर कोई कैसे लोगों को खेल के मैदान पर जाने से रोक सकता है। नेहरू युवा केन्द्र सरकारी जमीन पर है। वह किसी व्यक्ति विशेष की संपत्ति तो नहीं है। अगर आसपास के लोग वहां थोड़ा टहल लेते हैं, व्यायाम आदि कर लेते हैं तो किसी को भला क्या परेशानी हो सकती है? यदि इसके पीछे कोई राजनीतिक संरक्षण है भी तब भी तो किसी को प्रवेश करने से नहीं रोका जाना चाहिए। सत्ता पक्ष के लोगों को जनता के सामने सच्चाई बतानी चाहिए। क्यों बैठे बिठाए विपक्षी दलों को एक मुद्दा दिया जा रहा है? आज आसपास के लोग नाराज हैं कल और लोग भी ऐसी किसी हरकत को बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे। क्या सत्ता पक्ष जनता की नाराजगी झेलने को तैयार है? सरकार को भी ऐसे आरोपों का संज्ञान लेना चाहिए। यदि आरोप गलत हैं, तब भी जनप्रतिनिधि के प्रतिनिधि को जनता के बीच सब साफ करना चाहिए।