विधानसभा चुनाव २०२७
विधानसभा चुनाव २०२७ को लेकर सभी दल अपनी-अपनी तैयारी में लग गये हैं। भाजपा पहले से ही अपनी तैयारी में जुट गई है। अगर ये कहा जाए कि २०२७ का रोडमैप तैयार हो चुका है तो गलत नहीं होगा। भाजपा हर एक चुनाव के बाद दूसरे चुनाव की तैयारी में लग जाती है। इसके लगातार अभियान भी चलते रहते हैं। अब फिर तीस दिन का अभियान शुरू हो गया है। भाजपा के कार्यकर्ता वास्तव में बहुत ही समर्पित रहते हैं और दिन रात पार्टी का झंडा बुलंद किये रहते है। हालांकि जब कुछ मिलने का मौका आता है तो दूसरे दलों से आने वाले फायदा उठा लेते हैं। अब विधानसभा चुनाव के टिकट को लेकर जो सर्वे चल रहा है उसमें भाजपा के सहयोगी दलों के विधायकों की स्थिति ठीक नहीं आयी। इसलिए भाजपा सहयोगी दलों को झटका दे सकती है और कोई दबाव नहीं मानेगी। अपनों से ज्यादा सहयोगी दलों के टिकट काटने की चर्चा है। दरअसल, सर्वे में उन विधायकों के प्रति ज्यादा नाराजगी जो दूसरे दलों से भाजपा में शामिल हुए हैं। आज यूपी की बात करें तो भाजपा के ६२ विधायक ऐसे हैं जो बसपा से आये हैं। आठ विधायक ऐसे जो सपा से आये हैं। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक भी लंबे समय तक बसपा में रहे आज वे भाजपा में हैं वो भी बसपा से ही आये हैं। अगर गौर करें तो भाजपा का जो समर्पित कार्यकर्ता हैं वो आज भी पार्टी के प्रति पूरी तरह से वफादार है। एक जमाने में भाजपा के अनुशासन और समर्पण की मिसाल दी जाती थी। दूसरे दलों के लोगों को पार्टी बहुत सोच-विचार के बाद शामिल करती थी और साफ-सुथरी के लोग ही भाजपा लेती थी। लेकिन आज की स्थिति ये है कि दूसरे दलों के लोगों ने भाजपा में आकर भाजपा की संस्कृति और अनुशासन को तार-तार कर दिया है। आज की भाजपा भी सत्ता के लालच में पार्टी में शामिल होने वाले का कोई इतिहास नहीं देखती। दूसरे दलों के लोग जो भाजपा में आते हैं उनका इतिहास सबके सामने है। आज जो भाजपा में हैं और विपक्षी दलों पर कटाक्ष कर रहे हैं २०२२ का विधानसभा चुनाव याद किया जाए यही कटाक्ष करने वाले रातोंरात सपा में शामिल हो गये थे और जब सरकार नहीं बनी तो वापस आ गये। अगर गौर किया जाए जो सच्चा भाजपाई वो आज भी पूरी तरह पार्टी के प्रति वफादार है लेकिन अफसोस ये है कि अब ये भाजपा बदल चुकी है। वाजपेयी जी वाली भाजपा, अटल जी वाली भाजपा, मुरली मनोहर जोशी जी वाली भाजपा अब नहीं रही है। जय हिंद