गाजियाबाद (युग करवट)। देश में तेजी से बढ़ते ऑनलाइन कारोबार को लेकर पारंपरिक व्यापारियों का असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। इंडस्ट्रीज एंड ट्रेडर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने ऑनलाइन व्यापार और विदेशी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म की व्यापारिक नीतियों पर गंभीर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि ऑनलाइन और पारंपरिक व्यापार के बीच समान प्रतिस्पर्धा का वातावरण तैयार नहीं किया गया तो देश के करोड़ों छोटे दुकानदारों और उनसे जुड़े रोजगार के सामने बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। प्रेस वार्ता में एसोसिएशन के चेयरमैन महेश आहूजा ने कहा कि भारत का पारंपरिक व्यापार केवल दुकानदारी नहीं बल्कि करोड़ों परिवारों की आजीविका का आधार है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारी डिस्काउंट और आक्रामक व्यापारिक रणनीतियों के जरिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म छोटे व्यापारियों के बाजार को लगातार कमजोर कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश का पारंपरिक व्यापार बर्बादी के कगार पर है और सरकार को अब केवल दर्शक बने रहने के बजाय ठोस कदम उठाने होंगे। राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. एसपी त्यागी ने ऑनलाइन खरीदारी से जुड़े उपभोक्ता हितों पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऑनलाइन व्यापार में शिकायतों रिटर्न गुणवत्ता और भ्रामक विज्ञापनों से संबंधित समस्याएं लगातार सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल व्यापार को बढ़ावा देना अच्छी बात है, लेकिन उपभोक्ता और व्यापारी दोनों के हितों की कीमत पर किसी भी व्यापारिक मॉडल को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए। राष्ट्रीय महामंत्री प्रिन्स कंसल ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर डेटा सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि करोड़ों उपभोक्ताओं के खरीदारी संबंधी डेटा का इस्तेमाल बाजार की दिशा प्रभावित करने के लिए किया जा सकता है।
उन्होंने इसे केवल व्यापार का विषय नहीं बल्कि देश की आर्थिक और आंतरिक सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भारतीय उपभोक्ताओं का डेटा सुरक्षित रहे और उसका दुरुपयोग न हो। दुकानदार बनाम ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की लड़ाई तेज एसोसिएशन ने कहा कि पारंपरिक व्यापारी दुकान कर्मचारी बिजली किराया टैक्स और अन्य खर्च वहन करते हैं जबकि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भारी छूट और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं। इससे स्थानीय बाजारों में प्रतिस्पर्धा का संतुलन बिगड़ रहा है। संगठन के अनुसार इसका सीधा असर छोटे दुकानदारों कर्मचारियों सेल्स स्टाफ और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। एसोसिएशन ने ऑनलाइन व्यापार से जुड़े डेटा सुरक्षा, साइबर ठगी, उपभोक्ता उत्पीडऩ, भारी डिस्काउंट, विदेशी पूंजी के प्रभाव, कथित अनुचित प्रतिस्पर्धा और भारतीय कानूनों के पालन सहित कई मुद्दे सरकार के सामने रखे। संगठन ने आरोप लगाया कि कुछ ऑनलाइन कारोबारियों की नीतियां भविष्य में बाजार पर एकाधिकार की स्थिति पैदा कर सकती हैं।
व्यापारी संगठन ने स्पष्ट किया कि वह डिजिटल तकनीक और ऑनलाइन खरीदारी के खिलाफ नहीं है। संगठन की आपत्ति उन व्यापारिक नीतियों से है जिनसे पारंपरिक व्यापारियों के लिए समान अवसर समाप्त हो रहे हैं। एसोसिएशन ने सरकार से ऑनलाइन और ऑफलाइन व्यापार के लिए समान नियम पारदर्शी प्रतिस्पर्धा उपभोक्ता संरक्षण और डेटा सुरक्षा करने की मांग की।
संगठन ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते सरकार ने पारंपरिक व्यापार की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया तो इसका असर केवल दुकानदारों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि रोजगार स्थानीय बाजार छोटे उद्योग सरकारी राजस्व और देश की आर्थिक संरचना पर भी पड़ सकता है। प्रेस वार्ता में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राकेश जैन, कोषाध्यक्ष सतीश बिंदल, क्षेत्रीय संगठन मंत्री स्वतंत्र चौधरी, जिलाध्यक्ष आलोक गोयल, महानगर अध्यक्ष अनिल अरोड़ा तथा इंडस्ट्रीयल एरिया अध्यक्ष शक्तिसिंह उपस्थित रहे।