गाजियाबाद (युग करवट)। सिद्धपीठ श्री दूधेश्वर नाथ मठ महादेव मंदिर में गुप्त नवरात्रि के पहले दिन मां काली की पूजा-अर्चना हुई। मां काली, भगवान दूधेश्वर व मंदिर में विराजमान सभी देवी-देवताओं व सिद्ध गुरू मूर्तियों की पूजा-अर्चना भी की गई। मंदिर के पीठाधीश्वर जूना अखाड़ा के अंतर्राष्ट्रीय प्रवक्ता, दिल्ली संत महामंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष व जूना अखाड़ा की 13 मणी के अध्यक्ष, हिंदू यूनाइटिड फ्रंट के अध्यक्ष महंत नारायण गिरि महाराज ने कहा कि गुप्त नवरात्रि के पहले दिन मां काली की पूजा होती है। मां काली की पूजा से अहंकार, भय और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। दस महाविद्याओं में से प्रथम मां काली की आराधना से साधक में साहस, आत्मबल और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है।
महंत नारायण गिरि महाराज ने बताया कि मां काली का स्वरूप जितना उग्र और विकराल है, वे अपने भक्तों के लिए उतनी ही करुणामयी हैं। शत्रुओं या किसी भी प्रकार की बुरी नजर और टोने-टोटके से परेशान साधक के लिए मां काली की पूजा रक्षा कवच का काम करती है। काली साधना साधक के भीतर के भय को समाप्त कर असीम साहस भरती है।
गुप्त नवरात्रि की पूजा को गुप्त रखा जाता है, अत: ब्रह्म मुहूर्त या रात के समय एकांत में पूजा करना सबसे अच्छा होता है। मां को पूजा में काले तिल, गुड़, हलवा, खीर और मौसमी फल, लाल कमल या गुड़हल के फूल अर्पित करें।