विधानसभा चुनाव २०२७
गाजियाबाद (युग करवट)। विधानसभा चुनाव २०२७ को लेकर सभी लोग अपनी-अपनी तैयारी में लगे हुए हैं। भाजपा में कुछ ज्यादा ही मौजूदा उम्मीदवारों में कॉन्फिडेंस दिखाई दे रहा है। हालांकि चर्चाओं पर भरोसा करें तो एक विधानसभा में जो मौजूदा विधायक है उनके अंदर जो कॉन्फिडेंस हैं वो कॉन्फिडेंस सही है।
ये एक ऐसे विधायक है जो लगातार दो बार से विधायक है और टिकट मिलने से पहले ही दावा कर देते हैं कि टिकट उन्हें ही मिलेगा और ये दावा उनका सही साबित होता है। अब तीसरी बार भी उन्होंने ठोककर दावा किया है कि तीसरी बार भी टिकट उन्हें ही मिल रहा है। उनका दावा हर बार सही साबित हो रहा है। दरअसल, उनका व्यवहार उनकी मजबूत पकड़ उनके दावे को और मजबूत करती है। एक ऐसी विधानसभा है जिस पर सभी की नजर है। इस विधानसभा से जो विधायक है वो भी लोकप्रिय हैं लेकिन भाजपा में भी लोकप्रिय शब्द जिसके लिए इस्तेमाल होता है उसे फिर जोर का झटका भी लगता है। हालांकि अगर जनता में सर्वे होगा तो मौजूदा विधायक लोकप्रिय से ज्यादा जनप्रिय ही निकलेंगे। लेकिन आज की राजनीति में जनप्रिय से ज्यादा व्यवस्थापक होना जरूरी है। वहीं गैरभाजपाई दलों में भी असमंजस की स्थिति है सपा और कांगे्रस के बीच गठबंधन होगा या नहीं इस पर भी संशय है। दिल्ली में दो दिन में जो कुछ हुआ उसमें सपा और कांगे्रस के बीच थोड़ा मनमुटाव हुआ है। कांगे्रस के वरिष्ठ नेेता और सहारनपुर से सांसद इमरान मसूद के बयान भी सभी के सामने है। सोनिया गांधी और राहुल गांधी के बेहद निकट इमरान मसूद का बयान जुबान उनकी हो सकती है लेकिन शब्द हाईकमान के ही होंगे इससे इनकार नहीं किया जा सकता। विधानसभा चुनाव -२०२७ दरअसल, कांगे्रस और समाजवादी पार्टी के लिए बहुत अहमियत रखते हैं। अगर भारतीय जनता पार्टी विधानसभा का चुनाव हार भी गई तो इतना गलत संदेश नहीं जाएगा क्योंकि लगातार दस साल से वो सत्ता में हैं और केंद्र में भी वो सत्ता में है। लेकिन अगर कांगे्रस और समाजवादी पार्टी इस बार सत्ता में नहीं आयी तो फिर सपा की स्थिति भी बहुजन समाज पार्टी की तरह ही हो जाएगी। कांगे्रस का तो यूपी में कोई खास दम है ही नहीं लेकिन समाजवादी पार्टी जरूर लोकसभा चुनाव-२०२४ के बाद देश की तीसरी बड़ी पार्टी हो गई और यूपी में सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी। इसलिए २७ में यदि हार जाती है तो फिर सपा को बड़ा झटका होगा और कार्यकर्ताओं को थामना मुश्किल होगा। आज यूपी में भाजपा का मुकाबला केवल और केवल सपा ही कर सकती है इससे इनकार नहीं किया जा सकता। कांगे्रस का अकेले दम पर कोई वजूद नहीं है और बहुजन समाज पार्टी ने अपने आप को सक्रिय राजनीति से अलग कर लिया है। जिस पार्टी का एक जमाने में जलवा रहा हो, पार्टी की मुखिया कई बार मुख्यमंत्री रही हों, आज उस पार्टी की स्थिति ये हैं कि ना यूपी विधानसभा कोई सदस्य है और ना ही कोई लोकसभा और राज्यसभा में कोई सदस्य है। इसलिए विधानसभा चुनाव २०२७ सभी के लिए बहुत बड़ा चैलेंज है। करो और मरो वाली स्थिति है। गाजियाबाद की बात करें तो यहां चारों और भगवा ही है। किसी जमाने में सभी सीटों पर हाथी झूमता था आज झूमना तो दूर तक कोई महावत भी नहीं है।