कविनगर रामलीला समिति का मामला
गाजियाबाद (युग करवट)। कविनगर रामलीला कमेटी को लेकर चल रहा विवाद जो प्रशासन-शासन और हाईकोर्ट तक विचाराधीन है इसमें डीएम गाजियाबाद के हस्तक्षेप के बाद अब ये विवाद थम गया है। वहीं पूर्व सांसद डॉ. रमेशचंद तोमर जिन्होंने रामलीला कमेटी को लेकर प्रशासन-शासन को अवगत कराया था और मौजूदा कमेटी को लेेकर सवाल खड़े किये थे।
पूर्व सांसद की मेहनत रंग लाई और अब प्रशासन की ओर से बनाई गई समन्वय समिति यानि निगरानी समिति की देखरेख में अब खर्चा आदि होगा। दरअसल, विवाद लीला को लेकर नहीं मेले को लेकर था और जिस तरह से अंधाधुंध कमाई होती थी और खर्चे होते थे उसको लेकर पूर्व सांसद ने आवाज उठाई थी। पूर्व सांसद का कहना था कि भव्य रामलीला का आयोजन हो और भव्य तरीके से लीला हो लेकिन लोगों से जो चंदा आता है वो राम के नाम पर लूट के खिलाफ है। उन्होंने पहले डिप्टी रजिस्ट्रार के यहां मामला उठाया था और डिप्टी रजिस्ट्रार ने चार जुलाई को एक आदेश जारी करके पुरानी कमेटी को रद्द कर दिया था और २०११ वाली कमेटी को बहाल कर दिया था। इस कमेटी में लोग डॉ. रमेशचंद तोमर के ही थे जो लगातार वर्षों से रामलीला कराते आ रहे थे। लेकिन इस बीच अचानक फिर रजिस्ट्रार ने दस जुलाई को अपना आदेश रद्द करते हुए २०११ वाली कमेटी के बदले जो मौजूदा कमेटी थी उसी को बहाल कर दिया था और यहीं से फिर एक नया विवाद शुरू हुआ। पूर्व सांसद रमेशचंद तोमर इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिले और पूरे मामले से अवगत कराया। इसके अलावा संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना से मिले और उन्होंने उत्तर प्रदेश रजिस्ट्रार अलका वर्मा को बुलाकर मामले की जांच के आदेश दिये। साथ ही प्रमुख सचिव गृह संजय प्रसाद को भी मुख्यमंत्री ने पूरे मामले की जांच करने को कहा। हालांकि इस बीच इस मामले को लटकाने के लिए कुछ रणनीति भी चली और मामला लिंगरऑन करने के भी प्रयास हुए। लेकिन चार बार के सांसद डॉ. रमेशचंद तोमर शांत नहीं बैठे और वो लगातार मुख्यमंत्री कार्यालय के सम्पर्क में रहे साथ प्रमुख सचिव गृह संजय प्रसाद से दूरभाष पर सम्पर्क करते रहे। क्योंकि मामला मुख्यमंत्री के संज्ञान में था इसलिए इसे ज्यादा लटकाया नहीं गया। पूर्व सांसद डॉ. रमेशचंद तोमर ने इस बीच एक बार फिर मुख्यमंत्री से बात की और इस बार फिर सरकारी मशीनरी हरकत में आयी। डीएम गाजियाबाद से कहा कि वो इस मामले को देखें। डीएम ने इस मामले को पहले एडीएम सिटी से देखने को कहा लेकिन फिर डीएम ने खुद ही इस मामले को अपने हाथ में लिया और दोनों कमेटी के लोगों को बुलाकर उनके साथ बैठक की और इसका समाधान करा दिया। पूर्व सांसद डॉ. रमेशचंद तोमर भी यही चाहते थे कि दोनों कमेटी के लोग मिलकर काम करें और एक समन्वय समिति निगरानी के तौर पर प्रशासन की रहे जो खर्चे आदि को देखें और यही हुआ डीएम ने एडीएम सिटी की अध्यक्षता में निगरानी समिति बनाई और इस तरह पूर्व सांसद रमेशचंद तोमर की मेहनत रंग लाई। उन्होंने मुख्यमंत्री सहित सभी का आभार व्यक्त किया।
कॉरपोरेट कल्चर नहीं अब गरीबों की रामलीला: तोमर
पूर्व सांसद डॉ. रमेशचंद तोमर ने प्रशासन द्वारा बनाई गई निगरानी समिति का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि उनका यही प्रयास था कि लीला का मंचन कोई कराये लेकिन जो अंधाधुध खर्चा होता था और कारपोरेट कल्चर था उस पर अब रोक लगेगी और गरीब आदमी भी अब कविनगर रामलीला का आनंदा ले सकेगा।