हर दावेदार कर रहा है अपनी विधानसभा में जातिगत सर्वे
गाजियाबाद (युग करवट)। शहर सीट पर वैश्य समाज को टिकट देने की मांग लगातार की जा रही है। कई वैश्य संगठन इस बात को लेकर ऐलान कर चुके हैं कि अगर भाजपा ने वैश्य समाज के लोगों को टिकट नहीं दिया तो वो फिर अन्य दलों से आने वाले वैश्य समाज के उम्मीदवार को वोट करेंगे।
युग करवट ने भी कई बार इस संबंध में लोगों के बयान के आधार पर खबरें प्रकाशित की। बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी राय दी थी। जहां वैश्य समाज के समर्थन में लोग अपनी बात रख रहे हैं वहीं ब्राह्मïण समाज के समर्थन में भी लोगों ने अपनी बात रखी है। उनका कहना है कि ब्राह्मïण समाज को टिकट देना चाहिए। समाजसेवी राकेश सोनी ने कहा कि वो किसी समाज के विरोधी नहीं है लेकिन वैश्य को लेकर भाजपा ने हमेशा बड़ा दिल दिखाया है।
सांसद वैश्य, मेयर वैश्य, एमएलसी वैश्य, महानगर अध्यक्ष वैश्य सभी बड़े पदों पर वैश्य समाज के लोग आसीन है। उनका कहना है कि संजीव शर्मा ने जिस तरह से काम किया है वो सभी के सामने है और एक जनप्रतिनिधि के रूप में उन्होंने एक लंबी लाइन खींची है। वैश्य समाज को भाजपा ने बहुत कुछ दे रखा है। इस बार भी ब्राह्मïण को ही टिकट देना चाहिए। वहीं एक जनप्रतिनिधि ने बताया कि सदर सीट को वैश्य सीट कहा जा रहा है लेकिन नये परिसीमन के बाद सदर सीट पर वैश्य समाज की जनसंख्या बहुत कम हो गई। सदर सीट पर केवल वैश्य समाज के 19 हजार ही मतदाता है एवं ब्राह्मïण की बात की जाए तो 60 हजार से अधिक ब्राह्मïण है। उनका ये भी कहना है कि मुरादनगर सीट पर सबसे ज्यादा वैश्य समाज के लोग रहते हैं और वहां पर 90 हजार के आसपास वैश्य मतदाता हैं।
सदर सीट पर ब्राह्मïणों के बाद बड़ी आबादी दलित मतदाताओं की है इसलिए बार-बार ये कहना कि सदर सीट वैश्य बाहुल्य है बिल्कुल गलत है। आंकड़ों पर बात होना चाहिए। हवा में कुछ नहीं होना चाहिए। अगर वैश्य को दावेदारी करना है तो वो उस सीट पर करें जहां सबसे ज्यादा वैश्य मतदाता हैं। वहीं अन्य सीटों पर भी संभावित उम्मीदवारों ने अपनी तैयारियां कर रखी हैं। गाजियाबाद शहर सीट पर बातें तो इस समय संजीव शर्मा मौजूदा विधायक हैं और वो उपचुनाव जीतकर पहली बार विधानसभा पहुंचे हैं। उनके कार्यकाल को लेकर लोगों में काफी उत्साह है और एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं है जो इस बात की शिकायत करें कि संजीव शर्मा उनके साथ खड़े नहीं होते हैं। विरोधी भी इस बात को कहते हैं कि प्रताप विहार में जहां वो रहते हैं वहां पर सुबह में बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ रहती है और वो शायद ऐसे जनप्रतिनिधि होंगे जो जनता के बीच रहते हैं। हालांकि कोई ये नहीं चाहता कि उन्हें टिकट नहीं मिले सब ये चाहते है कि उन्हें टिकट मिले। सदर सीट पर जो दावेदार हैं कि उनका यही है कि संजीव शर्मा को पार्टी जरूर दे चाहे बराबर की विधानसभा सीट पर दे और इस सीट पर वैश्य समाज को उम्मीदवार बनाये। वहीं संजीव शर्मा की बॉडी लैंग्वेज से नहीं लगता कि उन्हें कोई इस बात का खतरा है कि टिकट उनका कटने जा रहा है।