फतेहपुर की घटना
दिल्ली में सीजेपी के चले प्रदर्शन के बाद मिली सफलता को लेकर एक नई बहस शुरू हो गई है। वहीं दूसरी ओर अब छात्र भी अपनी मांग के लिए सडक़ों पर उतरने के लिए तैयार हो गये हैं। फतेहपुर में एक स्कूल में पंखे लगाने को लेकर जो कुछ हुआ वो सभी में सामने है। बच्चे आंदोलन करने लगे और उनके आंदोलन का तरीका सीजेपी के आंदोलन की तरह ही था। स्कूल प्रशासन हरकत में आया और स्कूल में पंख लग गये। हालांकि अब आंदोलन में शामिल छात्रों से पूछताछ भी हो रही है। जाहिर बात है कि सीजेपी को मिली सफलता के बाद छात्रों में एक नया जोश पैदा हो गया और उसका संदेश फतेहपुर में मिला है लेकिन साथ ही एक संकेत भी है कि कहीं ऐसे आंदोलन का स्वरूप गलत ना हो जाए इस पर भी ध्यान देने की जरूरत है। वो गाना कि आंटी पुलिस बुला लेगी। अब बदलने लगा है और बच्चे कहने लगे कि हम सीजेपी वालों को बुला लेंगे। ठीक है लोकतंत्र में आवाज उठाने का सभी को अधिकार है लेकिन हिंसा और अराजकता की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती। दिल्ली में प्रधान के इस्तीफे के बाद लोगों की बहुत उम्मीदें सीजेपी के लोगों से होने लगी है। उनको लगता है कि अब उनकी आवाज उठाने के लिए उनके पास सीजेपी विकल्प है। वहीं सीजेपी के पदाधिकारी भी हर समस्या को लेकर आंदोलन के लिए तैयार हैं। सवाल ये पैदा होता है कि एक नेतृत्व मजबूत होना चाहिए क्योंकि देखा गया है कि आंदोलन का स्वरूप बदल जाता है। इसी कारण सही आंदोलन गलत दिशा में चले जाते हैं। सीजेपी को लेकर बहुत रीले बन गई हैं। भाजपा की सांसद एवं फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत का बयान भी सभी के सामने है। उनका कहना है कि दिल्ली में जो प्रदर्शन हुआ वो सब एक गटर की तरह है इसके जवाब में सीजेपी ने भी कहा कि जिसकी जैसी सोच होती है उसे वैसा ही दिखाई देता है। कांगे्रस की नेता रेणुका चौधरी ने भी कहा कि जो गटर से निकलेगा वो ही पहचान सकता है कि कौन गटर से निकला है। जाहिर है कि सीजेपी के प्रदर्शन के बाद शब्दों के भी तीर चलने लगे हैं और अब सडक़ों पर भी लोग निकलने लगे हैं। आवाज उठाने का मतलब ये नहीं है कि हिंसा की जाए या बड़े पदों पर आसीन लोगों के बारे में अशोभनीय शब्द निकाले जाए । जिन लोगों ने बड़े पदों पर आसीन नेताओं के लिए अशोभनीय शब्द कहे हैं उसे सभ्य समाज कभी स्वीकार नहीं कर सकता।