आखिरकार क्या हो रहा है?
भारत को आजादी दिलाने में सभी की भूमिका रही है। जब हिंदू-मुसलमान एक थाली में खाने लगे थे तब अंगे्रजों को लगा था कि अब भारत में रहना आसान नहीं है और वो भाग खड़े हुए। दो दशक पहले दो लोग टकराते थे चाहे वो हिंदू हो या मुसलमान हो वो केवल झगड़ा कहलाता था। वो कभी समुदाय नहीं कहे जाते थे। आज ऐसी स्थिति हो गई है कि अगर दो लोग टकराते हैं या झगड़ते हैं या कोई विवाद होता है तो पुलिस प्रशासन के अफसर तत्काल अपने अधीनस्थ से मालूम करते हैं कि दोनों लोग एक ही समुदाय के हैं या अलग-अलग। अगर एक ही समुदाय के होते हैं तो राहत की सांस लेते हैं और अगर अलग-अलग समुदाय के होते हैं तो अलर्ट मोड़ पर आ जाते हैं। आखिरकार कहां जा रहा है समाज। इतना ही नहीं राजनीति में भी यही हाल है कि अगर अलग-अलग समुदाय के होते हैं तो फिर राजनीति शुरू हो जाती है। झगड़े पहले भी होते थे, टकराव पहले भी होते थे, मनमुटाव पहले भी होते थे लेकिन ऐसा माहौल कभी नहीं होता था जैसा आज रहा है। आखिरकार एक दूसरे के प्रति इतनी नफरत क्यों है। चंद लोगों की वजह से समाज कहां जा रहा है। आपस में टकराने से केवल कमजोरी ही आती है। समाज में दूरियां पैदा होती हैं। ये देश सभी का है, आखिरकार एक दूसरे से इतनी दूरियां क्यों पैदा हो गई। हालांकि अब भी कुछ प्रतिशत ही लोग ऐसे हैं जो इन दूरियों का लाभ उठाते हैं। दोनों समुदायों को चाहिए कि वो एक दूसरे के प्रति एक अच्छा माहौल रखे, प्यार मोहब्बत जैसे पहले था उसी को कायम रखे, उसी को मजबूत करें क्योंकि मुट्ठी बंद होगी तो सब एक होंगे तो भारत और उन्नति करेगा। आज भारत एक मजबूत स्थिति में हैं। आज घर में घुसकर मारता था लेकिन अपने ही घर में अगर एक दूसरे के प्रति दूरियां होगी तो इससे केवल अपना ही नुकसान होगा। जय हिंद