विधानसभा चुनाव २०२७
विधानसभा चुनाव २०२७ को लेकर इस बार जो उम्मीदवार उतरेंगे उसमें काफी हद तक कई चौंकाने वाले चेहरे होंगे। ये बात केवल गाजियाबाद में ही नहीं उत्तर प्रदेश के कई जनपदों की विधानसभाओं में इस बार बदलाव दिखाई देगा। राजनीतिक गलियारों में हो रही चर्चाओं पर भरोसा करें तो समाजवादी पार्टी भी यादव और मुस्लिमों को कम टिकट देने जा रही है। इस बार उसकी सूची में पीडीए की पूरी तस्वीर दिखाई देगी। दरअसल सपा को पता है कि मुस्लिम वोट कहीं नहीं जाएगा इसलिए अन्य जातियों पर ज्यादा फोकस रहेगा। हालांकि मुस्लिम अब किसी के बंधुवा मजदूर भी नहीं हैं इसलिए उसके पास कई रास्ते हैं। भाजपा से दूरी बनाने वाले मुस्लिम इस बार कुछ अधिक प्रतिशत मतदान भाजपा के पक्ष में भी कर सकते हैं। क्योंकि सरकारी योजनाओं में कहीं भी कोई भेदभाव नहीं हो रहा है और मुस्लिमों को भी ये लगता है कि सभी दलों को देख लिया और अब भाजपा को भी देखा जाए। वैसे पांच से दस प्रतिशत वोट मुस्लिम हमेशा हर चुनाव में भाजपा को देता है लेकिन इस बार ये संख्या बढ़ सकती है। खासकर मुस्लिम महिलाएं भाजपा के प्रति कुछ ज्यादा रूझान दिखा रही है। क्योंकि कई ऐसे मुद्दे हैं जिसमें महिलाओं के प्रति भाजपा ने अन्य दलों के मुकाबले ज्यादा ध्यान दिया है। वहीं भाजपा भी इस बार अपने टिकट वितरण में कुछ सीटों पर मुस्लिम को उतारकर नया एक्सपेरिमेंट करना चाहती है। पूर्वांचल की कुछ सीटों पर ये एक्सपेरिमेंट हो सकता है। वहीं भाजपा इस बार अपने टिकट वितरण में तीन बार चुनाव लड़ चुके विधायकों को साइड लाइन करने पर विचार कर रही है और नये लोगों को मौका देने पर इसका पूरा फोकस है। इसमें भी युवाओं को आगे लाकर जेनजी को भी संदेश देना चाहती है। बहरहाल, इस बार का विधानसभा चुनाव सभी दलों के लिए काफी अहम है। अगर इस बार सपा की सरकार नहीं तो फिर कार्यकर्ताओं का हौंसला पस्त हो जाएगा। भाजपा ने अगर दो बार और तीन बार लगातार चुनाव लड़ चुके लोगों को मौका दिया तो भाजपा के अंदर भी कार्यकर्ताओं में असंतोष फैल सकता है। भाजपा के राष्टï्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के विधानसभा क्षेत्र का परिणाम सभी के सामने है और सभी कार्यकर्ता ये कहने लगे हैं कि अगर हाईकमान ने सही निर्णय नहीं लिया तो फिर बांकीपुर विधानसभा का रिजल्ट ही दिखाई देगा। जय हिंद