ये क्या हो रहा है!
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त रूख के बाद भी सरकारी मशीनरी अपने व्यवहार में बदलाव नहीं ला रही है। लगातार मंत्री, विधायक और सांसद इस बात का दर्द कई बार बयां कर चुके हैं कि जिले के बड़े अधिकारी फोन नहीं उठाते। मुख्यमंत्री और डीजीपी की ओर से बकायदा पुलिस और प्रशासन के अफसरों को सर्कुलर के माध्यम से निर्देशित किया गया था कि वो जनप्रतिनिधियों के फोन ही नहीं उठाये बल्कि उनकी बात को भी ध्यान से सुनें लेकिन ये सबकुछ कागजों तक ही सीमित है। जिस राज्य के मंत्रियों को पुलिस प्रशासन के खिलाफ धरने पर बैठना पड़े, आंसुओं से रोना पड़े तो फिर आम आदमी की क्या स्थिति होगी ये अंदाजा लगाया जा सकता है। इसमें कोई दोराय नहीं मुख्यमंत्री लगातार सख्त रूख अपनाते हैं लेकिन अफसर टस से मस नहीं हो रहे हैं। अब चुनावी मौसम है अब और नहीं होंगे क्योंकि उनको लगने लगा होगा कि माहौल बदल रहा है। अब प्रदेश के कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद अपने कार्यकर्ताओं के साथ गोंडा में धरने पर बैठ गये। उनका आरोप था कि पुलिस विनोद हत्याकांड में कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। जब मंत्री धरने पर बैठ जाए तो आप अंदाजा लगा सकते हैं कि सरकारी मशीनरी की क्या स्थिति होगी। वो ऐसा नहीं कुछ ही मिनट के लिए ही बैठे हो, ढाई घंटे तक कार्यकर्ताओं के साथ धरने पर रहे। दूसरी घटना भी कुछ इसी तरह है। सीतापुर में नगर विकास राज्यमंत्री राकेश राठौर पटेलनगर कोतवाली के गेट पर आंसुओं से रोये। उनका कहना था कि अतिक्रमण को लेकर पुलिस ने कार्यकर्ता को उठा लिया, उनके पिता को उठा लिया और एसपी और कोतवाल उनकी बात नहीं सुन रहे हैं इसलिए उन्हें कोतवाली आना पड़ा। वो बहुत भावुक हो गये आंसू निकल पड़े और कहने लगे कि कार्यकर्ता और उनके पिता ने कोई बड़ा अपराध नहीं किया उसके बाद भी उनकी ना एसपी सुन रहा है और ना ही कोतवाल। फोन पर बात हुई फिर भी नहीं माने तो कोतवाली आना पड़ा। आखिरकार ये क्या हो रहा है। इसमें कोई दोराय नहीं है कि जब-जब भाजपा की सरकार रही है हमेशा सरकारी मशीनरी हावी रही है और सरकारी मशीनरी के हावे रहने और उनके व्यवहार के चलते ही भाजपा को सत्ता भी गंवानी पड़ी। वो तो ये शुक्र है कि योगी आदित्यनाथ का डंडा बड़ा मजबूत है वरना शायद 2022 में सरकार रिपीट नहीं होती। बहरहाल, जहां मंत्री धरने पर बैठै और आंसुओं से रोये तो फिर क्या बचा है। जय हिंद