गाजियाबाद में भारतीय जनता पार्टी की क्षेत्रीय कमेटी में जाने के लिए कार्यकर्ताओं में मारामरी मची हुई है। प्रदेश के कुछ मोर्चों के लिए भी काफी भागदौड़ चल रही है। युवा मोर्चा में प्रदेश की टीम हो, क्षेत्र की टीम हो या महानगर की उनमें भी पद पाने के लिए संघर्ष दिख रहा है। भाजपा मेन के बाद अगर किसी अन्य संगठन का क्रेज है तो वह युवा मोर्चा ही है, उसके बाद नंबर आता है महिला मोर्चा का। तीसरे नंबर पर अनुसूचित मोर्चा कहा जा सकता है क्योंकि उसके लिए एक बड़ी लाइन कार्यकर्ताओं की है। आप गाजियाबाद के किसी भी कोने में चले जाइए, आपको कोई ना कोई भाजपा कार्यकर्ता मिल ही जाएगा जो आपको बताएगा कि वह मांग तो फलां पद रहा है पर कहीं ना कहीं तो एडजस्टमेंट हो ही जाएगा। भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष से लेकर प्रदेश के पदाधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों के यहां पद पाने की चाह रखने वालों की लंबी लाइन बहुत बड़ी हो चुकी है। आप किसी जनप्रतिनिधि के यहां या प्रदेश के प्रदाधिकारी के यहां एक चक्कर लगाकर आइए। आपकी ख्ुाद समझ में आ जाएगा कि कितनी बड़ी तादाद है भाजपा में पद पाने वालों की। बस इतना जरूर है कि भाजपा महिला मोर्चा इस मामले में पिछड़ रहा है। गाजियाबाद में भाजपा की अधिकतर महिला कार्यकर्ता, महिला मोर्चा की प्रदेश की टीम में जगह चाहती हैं। किसी वजह से वहां दाल ना गले तो क्षेत्रीय टीम में एडजस्ट होना चाहती हैं। मगर ऐसी बहुत कम महिला कार्यकर्ता हैं जो महिला मोर्चा की महानगर टीम में पद मांग रही हैं। मोर्चों की घोषणा होने के बाद नई महिला मोर्चा अध्यक्ष के सामने सबसे बड़ी समस्या महानगर की टीम खड़ी करने में ही आएगी। क्योंकि गाजियाबाद की महिला कार्यकर्ता महानगर में काम करने की इच्छुक नहीं हैं। इस बात में हैरानी इसलिए महसूस होती है कि भाजपा में तो कार्यकर्ताओं की बहुत बड़ी फौज है। कार्यकर्ता महिला हो या पुरूष सब प्रदेश और क्षेत्र की टीम में जाने को बेकरार हैं। महानगर मेन के लिए तो फिर भी लोग लगे हुए हैं, मगर महानगर महिला मोर्चा में अध्यक्ष पद को छोडक़र बाकी पदों पर इच्छुक अभ्यार्थियों की संख्या सीमित ही है। यह भाजपा के लिए चिंता की बात होनी चाहिए।