अगले साल होने वाले विधानसभा में राजनीतिक दलों के टिकट का ऊंट चाहे किसी करवट बैठे मगर संभावनाओं को लेकर आनंद अभी से आने लगा है। इस आनंद की सबसे बड़ी वजह है एक ही सीट पर दो या उससे अधिक संभावित प्रत्याशियों की तुलना। इस तुलनात्मक प्रक्रिया में हमारा कोई योगदान नहीं है। इस कठिन जज्बात से तो राजनीतिक दलों के लोग ही खेल रहे हैं। आनंद इस बात का भी लीजिए कि यह खेल सबसे अधिक मात्रा में भारतीय जनता पार्टी में ही खेला जा रहा है। गाजियाबाद जिले की बात करें तो सबसे हॉट मामला मुरादनगर और शहर गाजियाबाद पर है। मुरादनगर सीट पर तो भाजपा हो समाजवादी पार्टी, दोनों ही दलों में टिकट के दावेदार त्यागी समाज से अधिक हैं, तो साहिबाबाद सीट पर सपा और भाजपा में ब्राह्मïण समाज के दावेदार अधिक हैं। श्हर सीट पर वैश्य भी दावेदार हैं और ब्राह्मïण भी। लोनी में कई गुर्जर टिकट की लाइन में खड़े हैं। अगर आप सोशल मीडिया पर थोड़े भी सक्रिय हैं तो आपको संभावित प्रत्याशियों की तुलना का पता होगा ही। मुरादनगर सीट पर वर्तमान विधायक अजीत पाल त्यागी के सामने भाजपा के प्रदेश मंत्री बसंत त्यागी को रखकर तुलना की जा रही है। इस सीट से समाजवादी पार्टी से मनीषा त्यागी भी टिकट की दौड़ में शामिल हैं। शहर सीट पर वर्तमान विधायक संजीव शर्मा के सामने भाजपा के महानगर अध्यक्ष मयंक गोयल को रखकर टिकट की संभावना की तुलना की जा रही है। इस सीट पर समाजवादी पार्टी के लोग अभिषेक गर्ग के सामने विशाल वर्मा को रख कर स्थिति को माप रहे हैं। साहिबाबाद सीट पर कैबिनेट मंत्री सुनील शर्मा के सामने एक नए नए भाजपा पदाधिकारी को रखा जा रहा है। साहिबाबाद सीट से सपा के टिकट पर अमरपाल शर्मा ताल ठोक रहे हैं। लोनी और मोदीनगर सीट पर भाजपा कार्यकर्ता कुछ असमंजस में हैं। क्योंकि दोनों क्षेत्रों के भाजपा कार्यकर्ताओं को यह डर सता रहा है कि कहीं यह सीटें गठबंधन में राष्टï्रीय लोकदल के पास ना चलीं जाएं। ऐसा होता है तो मोदीनगर में मंजू सिवाच और लोनी में नंदकिशोर गुर्जर को परेशानी हो सकती है।