भारत पर्वों और त्योहारों का देश है। यहां बिना किसी पर्व के कोई महीना नहीं बीतता। अब स्वतंत्रता दिवस आ रहा है। उसके बाद 28 अगस्त को रक्षाबंधन का त्योहर मनाया जाएगा। सनातन धर्म में रक्षा बंधन का अपना अलग ही महत्व है। भाई-बहन के प्रेम और समर्पण को समर्पित इस त्योहार पर राखी और मिठाई आदि बड़े पैमाने पर खरीदी जाती है। बदलते समय के साथ बाजार पर इंटरनेट हावी है। लोग अधिकतर सामान ऑनलाइन खरीदना पसंद करते हैं। ठीक है आप हर रोज, हर सप्ताह या हर महीने ऑनलाइन शापिंग को प्राथमिकता देते हैं। मगर कम से कम रक्षाबंधन, होली, दिवाली जैसे त्योहार पर ऑनलाइन शापिंग को ना कहा कीजिए। ऐसे त्योहारों पर अपनी गली, अपने मुहल्ले या अपने शहर की दुकान से खरददारी कीजिए। आप इन दुकानों से सामान खरीदेंगे तो उनके पास भी कुछ पैसा आएगा। जैसे आप अपना त्योहार मना रहे हैं, आपकी वजह से वह भी अपना त्योहार मना पाएंगे। अगर आप उनसे सामान नहीं खरीदेंगे तो उनकी बिक्री नहीं होगी, बिक्री नहीं होगी तो उनके पास पैसे नहीं होंगे और उनके पास पैसे ही नहीं होंगे तो वह त्योहार कैसे मना पाएंगे। वैसे भी ऑनलाइन सामान बेचने वाली अधिकतर कंपनियां विदेशी हैं। क्या आपको यह पसंद आएगा कि आपके त्योहार पर आपके शहर का दुकानदार उदास रहे और मल्टीनेशल कंपनियां हजारों-लाखों कमाएं? आप याद कीजिए, जन्माष्टïमी पर दही हांडी का कार्यक्रम हो, लोहड़ी का सामुहिक कार्यक्रम हो, होली पर गीत-संगीत का कार्यक्रम रखा हो, कोई धर्म यात्रा या शोभायात्रा निकाली जा रहा हो, क्या कभी किसी ऑनलाइन शापिंग कंपनी ने कभी इसके लिए चंदा दिया है? आप जानते हैं कि ऐसा ना कभी हुआ है, ना कभी होगा। मगर ऐसे तमाम आयोजनों में हमारे अपने शहर के दुकानदार और व्यापारी जरूर आर्थिक सहायता करते हैं। रक्षा बंधन जैसे त्योहार में मुहं मीठा करने के लिए चॉकलेट भी ना लें, बल्कि विशुद्घ मिठाई का ही प्रयोग करें। त्योहार हमारा हो और मुनाफा विदेशी कंपनियां कमाएं, यह तो ठीक बात नहीं लगती ना। तो इस बार त्योहार पर अपनी नजदीकि दुकान को ना भूलें।