गुरूग्राम के पॉश इलाके गोल्फ कोर्स रोड पर 13 सितंबर की सुबह एक महिला बाइक राइडर शिवानी चौहान उर्फ सिया के साथ हुई हिट एंड रन की घटना ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा। एक गाड़ी ने सिया को जोरदार टक्कर मारी और फरार हो गया। हालांकि बाद में आरोपी कल्याण बैसला को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी से पहले बैसला ने सोशल प्लेटफार्म पर आकर सफाई भी दी। उसका जवाब सिया ने दिया, उसने एफआईआर दी, पुलिस और अदालत के सामने बयान भी दिए, जिसके कारण पुलिस ने केस में हत्या के प्रयास की धारा भी बढ़ा दी। सारा समाज, सारे इंफल्यूएंसर सिया के पक्ष में दिखाई दिए जो एक अच्छी बात भी है। पीडि़त का पक्ष भी लेना चाहिए, उसका समर्थन भी करना चाहिए और यथा संभव सहायता भी करनी चाहिए। जिस किसी ने भी इस घटना की वीडियो को देखा उसने पहली नजर में ही भांप लिया कि गलती गाड़ी चलाने वाले की है। हम भी यही मानते हैं और जल्द न्याय की मांग भी करते हैं। मगर मेरा सवाल इस घटना के दूसरे पहलू पर है। हम में से जितने भी लोग सडक़ पर बाइक राइडर्स को देख चुके हैं या देखते हैं, वह इनका सच जानते हैं। जिनका भी पाला बाइक राइडर्स से पड़ा है वह सब जानते हैं कि सडक़ पर ये लोग कितना हंगामा करते हैं। हाईस्पीड बाइक चलाना, रफ ड्राइव करना, सडक़ के नियमों की अनदेखी करना, यातायात को बाधित करना, क्या यह सब बाइक राइडर नहीं करते? क्या यह बाइक राइडर सडक़ पर पैदल चलने वालों को परेशान नहीं करते? अगर कोई इन्हें रोकने या ऐसा नहीं करने को कहता है तो यह बाइक राइडर झुंड बनाकर लडऩे को उतारू नहीं हो जाते? इनकी बाइक में आगे, पीछे, दाएं, बाएं हेलमेट में कई कैमरे लगे होते हैं। यदि कहीं कोई घटना हो जाती है, तो इनके कैमरों में वह कैप्चर हो जाती है। क्या उस रिकार्डिंग को अपनी मर्जी के हिसाब से एडिट करके उसे यह लोग विक्टिम की तरह इस्तेमाल नहीं करते? सिया की घटना अलग है, उसे न्याय मिलना चाहिए, मगर क्या बाइक राइडर्स को अपनी ड्राइव और व्यवहार में सुधार लाने की आवश्यकता नहीं है?