सारी चीजें एक तरफ और यूपी विधानसभा चुनाव एक तरफ। चर्चा टिकट मिलने की हो, टिकट कटने की हो, प्रत्याशी बदलने की हो, या फिर नए-पुराने गठबंधन की हो, बात हो आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर ही है। गाजियाबाद में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से माहौल गर्मा रहा है। गाजियाबाद की पांचों सीटों पर सबके अलग अलग दावे हैं। कार्यकर्ता भाजपा का हो या किसी और दल का, हर आदमी अपने-अपने हिसाब से टिकट काट और बांट रहा है। इन सबसे बीच मेरा सवाल दूसरा है। अभी हाल ही में खबर आई कि भारतीय जनता पार्टी गाजियाबाद में किसी एक सीट पर महिला उम्मीदवार को उतारेगी। मगर गाजियाबाद में तो मोदीनगर सीट से भाजपा की महिला विधायक है ही। तो क्या मोदीनगर में वर्तमान विधायक का टिकट पक्का मान लिया जाए। यदि ऐसा है तो फिर यह कहने की जरूरत ही क्या है कि भाजपा गाजियाबाद में एक सीट महिला को देगी? या फिर यह है कि मोदीनगर सीट को भाजपा गठबंधन के तहत रालोद को देने पर विचार कर रही है। अब यदि ऐसा है तो भाजपा लोनी, साहिबाबाद, गाजियाबाद और मुरादनगर सीट में से किसी एक पर महिला प्रत्याशी को उतारने की सोच रही है। अब सवाल यहां यह पैदा होता है कि लोनी, साहिबाबाद, गाजियाबाद और मुरादनगर में से किस सीट पर भाजपा में कितनी महिलाएं आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट की मांग करेंगी। अब तक कितनी महिलाएं जो भाजपा में सक्रिय राजनीति कर रही हैं, उनकी विधानसभा चुनाव के लिए दावेदारी है? या फिर किसी नेता के घर की महिला को प्रत्याशी बनाकर कोरम पूरा कर लिया जाएगा। यहां तो स्वर्गीय दमयंती गोयल, उसके बाद आशा शर्मा महापौर रहीं और अब सुनीता दयाल महापौर इसलिए हैं क्योंकि सीट महिला के लिए रिजर्व थी। वर्ष 2004 में सुनीता दयाल को भाजपा ने उपचुनाव में प्रत्याशी बनाया था। मगर भाजपा को जीत नहीं मिली थी। तो क्या आशा शर्मा या सुनीता दयाल भाजपा से विधानसभा का टिकट मांगेंगी? या भाजपा में कोई और महिला कार्यकर्ता भी हैं जो प्रत्याशी बनने को तैयार हैं। दूसरा सवाल क्या किसी और दल में भी महिला कार्यकर्ता विधानसभा चुनाव में टिकट के लिए दावेदारी करेंगी? क्योंकि कांग्रेस की डोली शर्मा ने लोकसभा चुनाव में बेहतरीन प्रदर्शन करके सभी को चौंका दिया था।