शामली में गायक अंकित बालियान की जघन्य हत्या से पूरा प्रदेश सिहर गया था। चार अपराधियों ने बहुत ही दुस्साहसिक तरीके से हत्याकांड को अंजाम दिया था। सरेआम हुए इस हत्याकांड से पुलिस विभाग भी सकते में आ गया था। लोग हत्याकांड को लेकर सरकार पर कानून व्यवस्था से संबंधित सवाल करने लगेे थे। पुलिस की जांच में सामने आया कि हत्याकांड को गोगी गैंग के सदस्यों ने अंजाम दिया है। सीसीटीवी फुटेज से शूटर्स की पहचान हुई। दो आरोपियों की पुलिस से मुठभेड़ हो गई। बताया गया कि दोनों ने पुलिस टीम पर हमला किया और पुलिस की जवाबी कार्रवाई में दोनों मारे गए। अब इस पूरे घटनाक्रम पर समाजवादी पार्टी का रुख अचंभित करता है। सपा के नेता का मुठभेड़ पर सवाल उठाना चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग समझ नहीं पा रहे हैं कि आखिर सपा नेता की हमदर्दी शूटर्स के प्रति क्यों है। जिस अंकित की हत्या हुई उसके या उसके पीडि़त परिवार के प्रति सपा की हमदर्दी क्यों नहीं आई। कहीं सपा नेता सरकार का विरोध करते-करते अपराधियों का समर्थन तो नहीं कर रहे हैं। आमतौर पर हमदर्दी पीडि़त के लिए होती है। जो पैसे लेकर हत्या करने लग गया हो, अब वह तो पीडि़त नहीं हो सकता। इस मामले में रालोद संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद केसी त्यागी की बात भी सुनने लायक है। वह कहते हैं कि सपा के नेता बताएं कि अगर कोई अपराधी पुलिस पर गोली चलाए तो पुलिस को क्या करना चाहिए? आज उन्होंने अंकित को मारा है, कल वह किसी और को भी मार सकते थे, क्योंकि अपराध तो उनके आदत में आ ही जाना था। दूसरी बात क्या सपा नेताओं को अंकित की मां, उसकी बहन और पत्नी के आंसू दिखाई नहीं दिए? या फिर उन आंसुओं की कोई कीमत नहीं समझी गई? हां यह बात अलग है कि अब हर हत्या के बाद आरोपरियों को मुठभेड़ में ढेर करने की मांग की जाने लगी है। लोगों को देर से मिलने वाले अदालती न्याय पर भरोसा नहीं रह गया है। वैसे भी चाहे हत्या का ही आरोप क्यों ना हो, देर सबेर जमानत हो ही जाती है। उसके बाद गवाहों को डराने जैसे कई मामले सामने आ जाते हैं। गाजियाबाद के चिराग और हापुड़ के गौरव हत्याकांड के आरोपियों को भी यही सजा देने की मांग उठ रही है।