२००९ से लेकर २०२४ तक
गाजियाबाद में आपराधिक घटनाओं का चलन कभी कम कभी ज्यादा चलता ही रहता है। समस्याएं भी हमेशा रही हैं। जाहिर है जैसे-जैसे गाजियाबाद की आबादी बढ़ रही है बड़ी संख्या में हाईराइज बिल्डिंग का निर्माण हो रहा है। दिल्ली के निकट होने के कारण बाहर के लोग यहां बस रहे हैं। स्वाभाविक है आबादी बढ़ेगी तो समस्याएं भी बढ़ेंगी। जबकि संसाधन जितने बढऩे चाहिए थे उतने नहीं बढ़े। हालांकि हमेशा एक योजना छोड़ दें तो लगातार भाजपा के ही सांसद रहे हैं। दरअसल, गाजियाबाद सीट हमेशा वीआईपी सीट रही है। २००९ से और २०२४ तक गाजियाबाद लोकसभा सीट वीवीआईपी सीट की श्रेणी में आ गई। २००९ में भाजपा के राष्टï्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह यहां से चुनाव जीते थे। राजनाथ सिंह के चुनाव जीतने के बाद पूरे देश में गाजियाबाद एक वीवीआईपी सीट बन गई। हालांकि तब केंद्र में भाजपा की सरकार नहीं थी। उसके बावजूद भी राजनाथ सिंह का इतना बड़ा कद है कि यहां पर तैनात हर अफसर पूरी तरह से उनके प्रति जवाबदेह था। जब राजनाथ सिंह यहां से सांसद थे तब बसपा और सपा दोनों की सरकारें प्रदेश में रहीं। राजनाथ सिंह के लखनऊ जाने के बाद इस सीट से जनरल वीके सिंह २०१४ में सांसद बने और वो लगातार २०२४ तक सांसद रहे। इस दौरान केंद्र में मोदी सरकार आ गई और वीके सिंह २०१४ से लेकर २०२४ तक केंद्र में मंत्री रहे और गाजियाबाद का वीवीआईपी दर्जा बरकरार रहा। अधिकारी पूरी तरह से जवाबदेही के लिए मौजूद रहते थे। जाहिर है आज स्थिति यह है कि अधिकारी किसी के प्रति कोई जवाबदेही नहीं निभा रहे हैं। यही कारण है कि यहां गाजियाबाद में जिस तरह पहले अफसरों को बड़े जनप्रतिनिधि होने के कारण जवाबदेही का डर रहता था अब वो नहीं रहा है। हालांकि बीच-बीच में मिजोरम के गवर्नर वीके सिंह गाजियाबाद आते रहते हैं और लोगों से फीडबैक लेकर अफसरों से बात भी करते हैं, लेकिन पहले जैसी जवाबदेही फिर भी दिखाई नहीं देती। जाहिर है गवर्नर का एक अपना प्रोटोकॉल होता है। वो संवैधानिक पद हैं। राजनीतिक हस्तक्षेप ज्यादा नहीं कर सकते। इसी कारण २००९ से लेकर २०२४ तक की जवाबदेही में फर्के आ गया है। हालांकि वर्तमान में जो जनप्रतिनिधि हैं वो भी समय-समय पर अफसरों से बात करते हैं, लेकिन उनकी एक सीमा होता है। उम्मीद की जानी चाहिए कि मोदी मंत्रिमंडल के विस्तार में गाजियाबाद को प्रतिनिधित्व मिले। ताकि फिर जनता की समस्याओं का समाधान हो और अफसरों को अहसास होगा कि उनकी भी अब जवाबदेही बनती है। जय हिन्द