गाजियाबाद में अनेक महान विभूतियां हुई हैं। अनेक महान नेता और महान व्यक्ति हुए हैं। कितनों ने अंतर्राष्टï्रीय स्तर पर ख्याति अर्जित की है। उनमें से कितने आज भी जीवित हैं और कितने ही स्वर्गवासी भी हो चुके हैं। गाजियाबाद में कितने ही नेता, सामाजिक व्यक्तित्वों के नाम पर पार्कों का मार्गों का नामकरण किया गया है। गाजियाबाद में मार्गों और सडक़ों का नामकरण करने का अधिकार नगर निगम के पास है। इसके लिए नामकरण समिति बनाई गई है। इसके प्रस्ताव को बोर्ड में रखा जाता है। बोर्ड पास करता है और नामकरण हो जाता है। गाजियाबाद में पहले मेयर स्वर्गीय दिनेश चंद्र गर्ग रहे। दमयंती गोयल, तेलूराम काम्बोज, अशु कुमार वर्मा, आशा शर्मा भी गाजियाबाद के मेयर रहे हैं। वर्तमान में सुनीता दयाल गाजियाबाद की मेयर हैं। दिनेश चंद्र गर्ग, दमयंती गोयल और तेलूराम काम्बोज अब इस दुनिया में नहीं हैं। दिनेश चंद्र गर्ग के पुत्र अतुल गर्ग पहले विधायक बने, फिर मंत्री रहे, और अब सांसद हैं। दमयंती गोयल के पुत्र मयंक गोयल भाजपा के गाजियाबाद के महानगर अध्यक्ष हैं। अशु वर्मा और आशा शर्मा भाजपा की राजनीति कर रहे हैं। सुनीता दयाल तो सीट पर हैं ही। तेलूराम कामबोज की एक पुत्री थी वह भी अब संसार में नहीं है। तेलूराम काम्बोज जनसंघी थे। भाजपा की स्थापना के समय से उसके साथ रहे। भारत रत्न पंडित अटल बिहारी वाजपेयी से उनकी निकटता रही है। उन्होंने अपना पूरा जीवन भाजपा के लिए समर्पित रखा। वह विशुद्घ पत्रकार भी थे। सारा जीवन खांटी पत्रकारिता की, सिद्घांतो का पालन करते हुए अखबार भी निकाला। भाजपा के इस समर्पित कार्यकर्ता तेलूराम काम्बोज के नाम पर शहर में कोई सडक़ या पार्क भी नहीं है। कम से कम मेयर होने के नाते ही नगर निगम किसी पार्क या सडक़ को तेलूराम कामबोज का नाम दे देता। दुखद बात यह भी है कि भाजपा का कोई कार्यकर्ता, कोई नेता, कोई पदाधिकारी, कोई जनप्रतिनिधि तेलूराम काम्बोज पार्क या मार्ग की मांग भी नहीं करता। बस गाहे-बगाहे पूर्व पार्षद हिमंशु लव उनको याद कर लेते हैं। वही इस पर अपना दुख और चिंता जताते रहते हैं।