यह बात तो किसी से छुपी नहीं है कि महापुरूषों का अपना अलग ही स्वैग होता है। उनकी वाणी में सच्चाई का वास होता है। वर्ष 2021 में किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि कभी अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी जैसा कोई मामला सामने भी आ सकता है। सामने आने को भी छोडि़ए किसी ने सोचा नहीं था कि राम मंदिर से भी कोई चोरी कर सकता है। पर महापुरूष तो दूर दृष्टï्या होते हैं। श्री कल्कि पीठाधीश्वर जगद्गुरू आचार्य प्रमोद कृष्णम ने वर्ष 2021 में एक ट्वीट किया था। इसमें उन्होंने लिखा था कि श्रीराम मंदिर निर्माण हेतु मैं भी कुछ देना चाहता हूं, लेकिन दूं किसे, लेने वाले तो सारे चोर हैं। एक यूजर ने इसको कोट करते हुए लिखा है कि आचार्य प्रमोद कृष्णम 2021 में ही भविष्यवाणी कर चुके थे। लेकिन सच बताऊं तो यह कोई भविष्यवाणी नहीं थी। यह अनुभव था, जो श्री कल्कि पीठाधीश्वर जगद्गुरू आचार्य प्रमोद कृष्णम के शब्दों से बाहर आया था। वह संत हैं उनकी वाणी मिथ्या हो ही नहीं सकती थी। आज राम मंदिर से चढ़ावा चोरी का मामला बच्चे-बच्चे की जुबान पर है। मगर क्या देश के प्रधानमंत्री ने इतने बड़े मामले पर एक भी शब्द बोला है? क्या भाजपा के चाणक्य पुकारे जाने वाले अमित शाह ने चढ़ावा चोरी के मामले पर एक भी वाक्य कहा है? इनको भी छोडि़ए ये तो सरकार चला रहे हैं, इन पर तो बहुत जिम्मेदारियां हैं। क्या आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत कुछ बोले हैं? भाजपा के किसी बड़े पदाधिकारी या नेता ने कोई बयान दिया है? मेरे ख्याल से तो सारे सवालों का जवाब ना है। लेकिन यदि सरकार में बैठे लोग वर्ष 2021 में ही आचार्य प्रमोद कृष्णम की बात को मान लेते तो कम से कम बीते छह वर्षों की चोरी तो रुक ही सकती थी। मगर सरकार चला रहे लोग आंखे मूंदे रहे। जो हो रहा है उसे होने दिया जाता रहा। आज करोड़ों लोगों की आस्था पर संकट है। इसके बाद बद्री विशाल समेत कुछ और मंदिरों से भी चोरी की खबरें सामने आईं। यदि अभी भी आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं की गई और यदि एक भी आरोपी को बख्शा गया तो यकीन मानना ना राम माफ करेंगे, ना राम को मानने वाले माफ करेंगे।