आईएएस मेधा रूपम तकरीबन एक साल से नोएडा की डीएम हैं। इस दौरान उन्होनें कई उतार चढ़ाव भी देखे। एक बार तो उन्हें अपना एक्स एकाउंट कुछ दिन के लिए बंद भी करना पड़ा था। युवा इंजीनियर की मौत के मामले में भी उनसे सवाल किए गए थे। उनके पिता चुनाव आयोग के अध्यक्ष हैं, और पति फिलहाल आगरा के डीएम हैं, इस पर भी उनको ट्रोल किया गया था। मगर आईएएस मेधा रूपम ने कभी किसी बात की परवाह नहीं की तथा अपना काम मजबूती और इमानदारी से करतीं रहीं। आज तक कोई ऐसा व्यक्ति नहीं मिला जो अपनी समस्या लेकर मेधा रूपम के पास गया हो और संतुष्टï नहीं लौटा हो। मेधा हापुड़ की जिलाधिकारी भी रही हैं। हापुड़ के लोग आज भी उनको याद करते हैं, उनकी प्रशंसा करते हैं। अब उन्होंने एक काम आरैर ऐसा किया है, जिसकी सराहना तो बनती है। इससे पता चलता है कि मेधा कितनी संवेदनशील हैं। आईएएस मेधा रूपम ने लोकल लेवल कमेटी की बैठक में 11 दिव्यांगजनों को कानून अभिभावक प्रमाण पत्र जारी किए। इससे उन 11 दिव्यागजनों को बहुत सहुलियत मिली। ऐसे दूसरे लोगों की उम्मीद भी जगी। उसी बैठक में डीएम मेधा रूपम ने दिव्यांगजनों से जुड़े किसी भी मामले को पैंडिंग नहीं रखने के कड़े निर्देश भी दिए। यही प्रदेश सरकार की मंशा भी है। अपने हर जनता दरबार कार्यक्रम में सीएम योगी भी यही तो कहते हैं। मेधा रूपम द्वारा किए गए इस कार्य को दिव्यांगजनों के कल्याण और सामाजिक न्याय के लिए उठाया गया संवेदनशील कदम बताया जा रहा है। मेधा रूपम ने जुलाई 2025 में नोण्डा की डीएम के रूप में कार्यभार संभाला था। श्रमिक हिंसा मामला उनके सामने एक बड़ी चुनौती लेकर आया था। मगर उसे भी उन्होंने बड़ी सूझबूझ, संवेदनशीलता और कानून का पालन करते हुए संभाला था। एक अधिकारी ऐसा ही होना चाहिए।