शादी विवाह का मौसम है। कई तरह के समारोह आजकल चल रहे हैं। ऐसा तो संभव नहीं है कि शादी या सगाई आदि का समारोह हो और वहां कोई नेता ना पहुंचे। हमारे यहां तो माहौल ही ऐसा रहता है कि अगर कोई नेता नहीं भी मौजूद हो तब भी बात घूम फिर कर राजनीति पर ही आ जाती है। आजकल लोगों में जब ऐसी चर्चा चलती है तो विषय आगामी विधानसभा चुनाव का आ ही जाता है। लोग यह सवाल कम पूछते हैं कि भाजपा किसी का टिकट काटेगी या नहीं? भाजपा कोई बदलाव करने जा रही है कि नहीं? अब सबसे ज्यादा पूछे जाने वाला सवाल है कि सपा किसे लड़ाएगी। कांग्रेस के हिस्से में कौन सी सीट आएंगी। कांग्रेस को जो सीट मिलेगी उस पर वह किसे लड़ाएगी। गाजियाबाद शहर सीट हो या मुरादनगर सीट, दोनों ही जगह समाजवादी पार्टी पर कई-कई उम्मीदवार हैं। साहिबाबाद पर सबसे मजबूत दावेदारी अमरपाल शर्मा की है। संभावना है कि सपा साहिबाबाद से उन्हें टिकट दे भी देगी। चुनाव लडऩा और जीतना दोनों अलग अलग बातें हैं। चुनाव लडऩे की इच्छा और जीत की तैयारी में बहुत अंतर है। कांग्रेस में संभावित प्रत्याशी की बात चलती है तो, सुशांत गोयल से शुरू होती है और डॉली शर्मा पर समाप्त हो जाती है। समाजवादी पार्टी में जरूर कुछ ज्यादा नाम लिए जाते हैं। मगर सवाल वही है कि सपा के टिकट पर चुनाव लडऩे की इच्छा रखो ये अच्छी बात है। मगी जीतने की तैयारी कितनी है, यह भी तो आंकिए। इस बात का आंकल करने के लिए किसी एजेंसी से सर्वे करने की कोई आवश्यकता नहीं है। बस आप अपने गिरबान में झांक लिजिए। आपका तत्काल सच से सामना हो जाएगा। भाजपा बूथ स्तर तक काम कर चुकी है। चुनाव आज घोषित कर दीजिए, भाजपा का बूथ प्रबंधन एक दम सक्रिय हो जाएगा, आपको नजर आने लगेगा। क्या सपा ने बूथ स्तर पर तैयारी कर ली है? दावे जरूर किए जा सकते हैं। मगर दावों में और सच्चाई में बहुत फर्क होता है। समाजवादी पार्टी का संगठन भी बहुत कुछ करता दिख नहीं रहा है। जिससे यह आभास हो कि हां सपा आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रही है। इच्छा से परिणाम नहीं बदले जा सकते। उसके लिए तो कड़ा परिश्रम करना ही पड़ता है।