संजीव शर्मा जब भारतीय जनता पार्टी के महानगर अध्यक्ष थे, तब भी वह अपने सहयोगियों और समर्थकों को अवश्यकता से अधिक महत्व देते थे। उनके कार्यकाल के पदाधिकारी व कार्यकर्ता आज भी संजीव शर्मा के व्यवहार के कायल हैं। संजीव शर्मा आज के दौर के हिसाब से नहीं बल्कि एक अलग तरह की अपनी ही राजनीति करते हैं। अगर हम यह कहें कि वर्तमान में अपने क्षेत्र में जनता के बीच सक्रिय रहने वाले विधायकों में वह पहले स्थान पर हैं तो कुछ गलत नहीं होगा। बाकि विधायक अन्य कारणों से सक्रिय रहते हैं, मगर अगर जनता के बीच, जनता के साथ कोई हर समय खड़ा रहता है तो वह निसंदेह संजीव शर्मा ही हैं। अभी हाल ही में उन्होंने जो किया उससे शायद भाजपा के ही दूसरे विधायक व अन्य जनप्रतिनिधि असहज महसूस कर रहे होंगे। हुआ यूं कि संजीव शर्मा विधानसभा के सत्र में भाग लेने के लिए लखनऊ गए थे। वह अपने साथ शहर विधानसभा क्षेत्र के मंडल अध्यक्षों को भी ले गए थे। साथ में पूर्व महापौर अशु कुमार वर्मा भी थे। संजीव शार्म ने सभी मंडल अध्यक्षों की मुलाकात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ कराई। यह संभवत: पहली बार था कि किसी विधायक ने अपने क्षेत्र के मंडल अध्यक्षों को मुख्यमंत्री से मिलवाया था। मंडल अध्यक्ष भी खुश थे। पूर्व मेयर अशु कुमार वर्मा भी सीएम से मिलकर आए। सीएम से मिलकर विधायक संजीव शर्मा ने केवल अपने विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्यों की ही बात नहीं रखी, बल्कि उन्होंने दिवंगत फोटो जर्नलिस्ट उस्मान सैफी के परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग भी रखी। मीडिया से जुड़े लोग किसी एक विधानसभा के नागरिक नहीं होते। इसलिए भाजपा का कोई और विधायक या सांसद भी मुख्यमंत्री से इस मांग को कर सकता था। मगर क्योंकि संजीव शर्मा खुद को दूसरों से बहुत अलग रखते हैं, हर व्यक्ति के दुख-सुख को समझते हैं। इसलिए उन्हें अहसास रहा कि उस्मान सैफी के दुनिया से चले जाने के बाद उसके परिवार को आर्थिक सहायता की आश्वयकता है। लाइनपार क्षेत्र में बालिका महाविद्यलय, श्मशान घाट, क्रासिंग से शाहबेरी तक नाले के निर्माण सहित कई विकास कार्यों की मांग सीएम के सामने रखीं। कोई कुछ भी कहे, मगर संजीव शर्मा ने सभी जनप्रतिनिधियों के सामने एक बड़ी लाइन तो खींच ही दी है।