बांकीपुर विधानसभा का परिणाम
भाजपा के राष्टï्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की सीट पर जन सुराज पार्टी के प्रशांत किशोर की जीत होने के बाद अब भाजपा यूपी विधानसभा के चुनाव में उम्मीदवारों के चयन में बहुत ही सावधानी बरतेगी। सूत्रों के अनुसार बांकीपुर विधानसभा चुनाव में जिन उम्मीदवार को उतारा गया था उनको लेकर कार्यकर्ताओं में सही राय नहीं थी। दूसरे का नाम काटकर नीरज सिन्हा को टिकट दिया था और जो परिणाम आया उसने हाईकमान को भी हिला दिया। उप चुनाव के परिणाम से किसी सरकार पर असर भले ही ना पड़ा हो लेकिन जो संदेश गया है उसका असर राजनीति पर जरूर पड़ेगा। चर्चा है कि भाजपा अपने राष्टï्रीय अध्यक्ष की सीट पर ही जीत दर्ज नहीं कर पायी तो फिर आगे रिजल्ट क्या होगा। दरअसल चुनावी मौसम में इस तरह के संदेश अहम भूमिका निभाते हैं। बांकीपुर विधानसभा सीट पर 30 साल से भाजपा का कब्जा था। हालांकि मध्यप्रदेश की दतिया सीट पर भी भाजपा को करारी हार मिली लेकिन उसकी चर्चा इतनी नहीं हो रही है जितनी बांकीपुर विधानसभा की हो रही है। यूपी का विधानसभा चुनाव कुछ ही महीने बाद होना है इसलिए इस बार उम्मीदवारों के चयन में भाजपा ने अपनी रणनीति में कुछ बदलाव किया है। वैसे भाजपा तीन स्तरीय सर्वे करा रही है। लेकिन बांकीपुर विधानसभा के रिजल्ट के बाद अब उम्मीदवारों के चयन को लेकर संगठन और आम कार्यकर्ताओं के बीच ऑब्जर्वर जाएंगे जो जमीनीतौर पर उम्मीदवारों के बारे में राय लेंगे। अब ये कहना कि भाजपा का टिकट का सर्टिफिकेट है बांकीपुर विधानसभा के उपचुनाव के परिणाम गलत साबित कर दिया। क्योंकि जब नीरज सिन्हा को टिकट दिया था तो लोगों ने विरोध किया था इस पर हाईकमान का कहना था कि भाजपा दो दशकों से अधिक यहां से चुनाव जीत रही है और भाजपा का टिकट किसी को भी मिल जाएगा उसकी जीत पक्की है। इसे विश्वास कहे या अहंकार कुछ भी हो जनता की अदालत ने दोनों को अस्वीकार कर दिया और एक ऐसे व्यक्ति को जीत दिला दी जिसकी पहले जमानत जब्त हो चुकी थी।
जय हिंद