आजकल सबसे ज्यादा अगर किसी चीज में कमी आयी है तो एक दूसरे के प्रति विश्वास और भरोसे में। साथ ही सोशल मीडिया के बाद अब एआई भी भरोसे में कमी पर अहम भूमिका निभा रहा है। मैंने कई बार लिखा है कि कोई कितना भी करीबी है वो मोबाइल पर नॉर्मल कॉल करता ही नहीं है और हमेशा व्हाटसएप कॉल करता है। ये सबसे बड़ा भरोसे का टोटा है। पहले सोशल मीडिया के चक्कर में बहुत सी गलतफहमिया फैलती थी। अब जब से एआई आया है तब से तस्वीर और ज्यादा बिगड़ गई। अब सोशल मीडिया पर इतनी फर्जी खबरें आ रही है कि जब सच्ची खबर भी आती है तो लोग उस पर भरोसा नहीं करते। सोशल मीडिया पर कभी मोदी हटे, योगी हटे, अमित शाह गये, राहुल को लेकर तरह-तरह की खबरें आती रहती है। आज की युवा पीढ़ी कहीं ना कहीं उससे प्रभावित भी होती है। एआई के बाद किसी भी बड़े पत्रकार की तस्वीर लगाकर ऐसी खबर डाली जाती है जिस पर आदमी असमस्जस में रहता है कि वास्तव में ये खबर सही है या गलत है। किसी बड़े फिल्मी स्टार को लेकर सोशल मीडिया पर खबरें आती है। कल चीन के राष्टï्रपति कोमा में चले गये ये खबर ली, कभी किसी बड़े नेता तो कभी सोनिया गांधी की मौत की खबरें आती रहती है। ये बहुत ही गलत है। सरकार की जिम्मेदारी है कि ऐसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अंकुश लगाये। लोकतंत्र में सबको आवाज उठाने का हक है, सबको बोलने का हक है लेकिन अफसोस इस अधिकार को गलत रास्ते पर ले जाया जा रहा है। जंतर-मंतर पर जिस तरह देश के प्रधानमंत्री को गालियां दी गई, उनकी मां को गालियां दी गई ये किसी भी हाल स्वीकार नहीं होना चाहिए। चाहे जेनजी हो या कोई भी हों लोकतंत्र का गलत इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। अफसोस की बात ये है कि कुछ लोग इसको सही भी मानते हैं और एक दूसरे को शेयर भी करते हैं जिस तरह रीले बनाकर एक दूसरे का अपमान किया जाता है सरकार को चाहिए इस पर भी सख्त कानून बनाया जाए और सख्त कार्रवाई की जाए। क्योंकि सरकार की जिम्मेदारी है कि ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कदम उठाना चाहिए। लोकतंत्र का मतलब ये नहीं है कि किसी का भी अपमान कर दें। अफसोस की बात तो ये है कि ना सरकार और ना विपक्ष ऐसे गंभीर मुद्दे को उठाती है। आज लोकतंत्र के नाम पर जो नंगा नाच हो रहा है वो बंद होना चाहिए। वरना नई पीढ़ी ना जाने क्या सीख ले और फिर क्या देश को भुगतना पड़े। जय हिंद