बेशक यूपी में मानसून का विधानसभा और विधान परिषद का मौजूदा सत्र हंगामे की भेंट चढ़ गया हो, बेशक सरकार सदन चलाने में कामयाब नहीं हो सकी हो, मगर एक काम वहां बड़ा हुआ। एमएलसी दिनेश गोयल एक बार फिर अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराने में कामयाब रहे। गाजियाबाद में अनेक जनप्रतिनिधि हैं। इनमें सांसद हैं, विधायक हैं, सरकार में मंत्री भी हैं। मगर एमएलसी दिनेश गोयल ने अपना एक अलग मुकाम बनाकर रखा है। उन्होंने अपनी पहचान एक ऐसे जनप्रतिनिधि के रूप में बनाई है, जो सदन में बेबाकी से जनहित की बात उठाते हैं। पूर्व में नगर निगम द्वारा बढ़ाए गए हाउस टैक्स के मामले में उन्होंने जनता की पीड़ा को उठाया था। एमएलसी दिनेश गोयल ने प्रदेशीय विद्युत व्यवस्था जांच समिति का सभापति रहते हुए बिजली उपभोक्ताओं की समस्या का समय से निस्तारण नहीं करने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई का मुद्दा उठाया था। उन्होंने उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, युवाओं के लिए बेहतर रोजगार और शिक्षकों की समस्याओं को उठाया है। सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे और अतिक्रमण से होने वाली समस्याएं सदन में रखी हैं। अब उन्होंने स्कूली बसों के टोल टैक्स माफी का मामला उठाया है। उनका कहना है कि स्कूल बसों को सुबह शाम टोल से गुजरना पड़ता है। इससे स्कूल परिवहन पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है, जो अभिभावकों से ही वसूला जाता है। उनका टोल माफ हो जाए तो हजारों अभिभावको को राहत दी जा सकती है। इससे पहले उन्होंने महिला सुरक्षा का मामला सदन में उठाया था। उन्होंने कहा कि परिवहन निगम की बसों में लगे पैनिक बटन ख्राब हो चुके हैं। इससे गाजियाबाद समेत पूरे एनसीआर में महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल पैदा हो गया है। उन्होंने सभी बसों के पैनिक बटन तत्काल ठीक कराने की मांग की। इसके साथ ही वह स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला, युवा आदि से संबंधित बात सदन में रखते रहे हैं। एमएलसी दिनेश गोयल ने जता दिया है कि वह जनहित और समाजहित के मामले में कितने संवेदनशील हैं। उनके इन कार्यों से भाजपा के प्रति लोगों में विश्वास बढ़ा ही है। अन्य जनप्रतिनिधियों को भी ऐसा ही काम करना चाहिए। ताकि समाज का भला हो सके।